बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। बेमौसम बारिश आलू उत्पादक किसानों का अर्थशास्त्र बिगाड़ रही है। इन दिनों अधिकतर किसानों की आलू फसल खेतों में खुदी पड़ी है। ऐसे में बारिश खेतों में खुदे पड़े आलू को सड़ा सकती है। यह बारिश आलू किसानों को तो नुकसान पहुंचाएगी ही साथ ही उपभोक्ताओं की जेब पर भी भार बढ़ेगा।
आलू उत्पादक किसानों देवा सिंह, उत्तम टंडन,प्रेम सिंह, सीताराम राठौर, प्यारेलाल आदि का कहना है कि पिछले एक माह से हर हफ्ते हो रही बारिश आफत बन गई है। एक तरफ फरवरी माह में हुई बेमौसम बारिश से जहां आलू फसल उत्पादन पर असर पड़ा है, तो दूसरी तरफ मार्च माह में पककर तैयार हुई फसल की खोदाई के समय बुधवार रात और गुरुवार सवेरे से हुई बारिश से कार्य बाधित हो गया है। इस समय अधिकतर किसानों के खेतों में आलू फसल खुदी पड़ी है। ऐन वक्त पर हुई बेमौसम बारिश से किसान खोदाई की गई आलू फसल को इकट्ठा नहीं कर पा रहे हैं। जिससे फसल सड़ने का खतरा मंडराने लगा है। इससे परेशान किसानों का कहना है कि आलू फसल खोदाई के बाद वे वसंतकालीन गन्ना बुआई करते हैं। बारिश के चलते खोदाई कार्य बाधित होने से गन्ना बोवाई में भी देरी हो रही है। जिससे उन्हें दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।
इस बारिश से आलू उत्पादक किसानों को नुकसान होने की आशंका है। इस समय किसानों के खेतों में आलू फसल खोदाई कार्य तेजी से चल रहा है। जिन किसानों के खेतों में आलू के ढेर लगे हुए उसमें बारिश का पानी नुकसानदेह साबित होगा। साथ ही जिन किसानों ने फसल खोदाई शुरू नहीं की है, उनकी फसल के सड़ने का खतरा है।
-डॉ पीके बिसेन, वरिष्ठ वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र लखीमपुर