लखीमपुर खीरी। अब गांवों में भी अपने मनमुताबिक भवनों का निर्माण कराना संभव न होगा, क्योंकि नगरीय क्षेत्रों की भांति ग्रामीण क्षेत्रों में भवन निर्माण कराने से पहले मानचित्र (नक्शा) पास कराना अनिवार्य हो गया है। सभी प्रकार के भवनों के नक्शों एवं निर्माण को नियंत्रित और विनियमित करने के उद्देश्य उपविधि तैयार की गई है, जिसे मंडलायुक्त लखनऊ से अनुमोदन के बाद सरकारी गजट में प्रकाशित किया जा चुका है।
उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत अधिनियम 1961 के तहत प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग करते हुए जिला पंचायत ने ग्रामीण क्षेत्र के तहत बनने वाले सभी प्रकार के भवनों के नक्शों निर्माण को नियंत्रित करने के लिए उपविधि तैयार करके उसे लागू किया गया है। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार सिंह ने समस्त अवर अभियंताओं और राजस्व कर्मचारियों से नई व्यवस्था लागू कराने के लिए कहा है। उन्होंने खासकर राजस्व निरीक्षक, सहायक राजस्व निरीक्षक और वसूली कर्मचारियों को निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्रों में निर्मित होने वाले भवन के स्वामियों को जिला पंचायत से मानचित्र स्वीकृत कराने के लिए प्रेरित करें और कार्यालय को भी सूचना देकर अवगत कराएं। अपर मुख्य अधिकारी ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में भवनों का निर्माण कराने वाले समस्त लोगों को अपने निर्मित होने वाले भवनों के निर्माण से पहले मानचित्र स्वीकृृत कराना अनिवार्य है। मानचित्र स्वीकृत कराने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू कराएं। उन्होंने कहा है कि बिना नक्शा पास कराए भवन निर्माण कराने पर भवन स्वामी के विरुद्ध उत्तर प्रदेश क्षेत्र पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 240 के तहत अर्थदंड का प्रावधान किया गया है।
पांच और 10 रुपये प्रति वर्ग फुट पड़ेगा शुल्क
भवन निर्माण के लिए मानचित्र स्वीकृत कराने पर शुल्क भी जमा करना होगा। अपर मुख्य अधिकारी अशोक कुमार सिंह ने बताया कि कामर्शियल भवन के लिए 10 रुपये प्रति फुट और आवासीय भवन के लिए पांच रुपये प्रति वर्ग फुट के हिसाब से शुल्क जमा करना होगा।
नगरीय क्षेत्रों की भांति ग्रामीण क्षेत्रों में भी भवनों के बेतरतीब निर्माण कार्यों को नियंत्रित करना आसान हो जाएगा। इस व्यवस्था से ग्रामीण क्षेत्रों में भवनों को सूचीबद्ध करने की शुरुआत हो जाएगी। साथ ही जिला पंचायत की आमदनी बढ़ेगी।
-अशोक कुमार सिंह, अपर मुख्य अधिकारी