लखीमपुर खीरी। इस वर्ष सरकारी गेहूं खरीद में सभी एजेंसियों को पीएफएमएस (पब्लिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम) से भुगतान अनिवार्य रूप से करना होगा। इसके लिए सभी सहकारी एजेंसियों के केंद्र प्रभारियों के डिजीटल सिग्नेचर बनाने के निर्देश जारी किए गए हैं। एआर कोऑपरेटिव रत्नाकर सिंह ने पीसीएफ, पीसीयू, यूपीएसएस आदि एजेंसियों के जिला प्रबंधकों को तत्काल 15 फरवरी 2020 तक सभी केंद्र प्रभारियों के डिजीटल सिग्नेचर बनाने के निर्देश दिए हैं।
पिछले वर्ष धान खरीद में सिर्फ दो एजेंसियों मार्केटिंग और एफसीआई ने ही पीएफएमएस से भुगतान किया है। जबकि पीसीएफ, पीसीयू, एग्रो, एसएफसी आदि ने आरटीजीएस से भुगतान किया था। शासन ने एक अप्रैल 2020 से गेहूं खरीद की तैयारी के लिए समय सारिणी जारी कर दी है, जिसके अनुसार 15 फरवरी 2020 तक क्रय केंद्रों का चयन किया जाना है। इसके बाद डीएम द्वारा क्रय केंद्रों का एक मार्च 2020 तक अनुमोदन किया जाएगा। जिला खाद्य विपणन अधिकारी लालमणि पांडेय ने बताया कि गेहूं क्रय केंद्रों की आवश्यकता का आंकलन कराकर आवश्यक धनराशि, बोरों, स्टाफ और किसानों के लिए सुविधाएं आदि व्यवस्थाएं क्रय केंद्रों पर 10 मार्च 2020 तक पूर्ण करानी हैं। इस बार सभी एजेंसियों को अनिवार्य रूप से किसानों को पीएमएफएस से भुगतान करना होगा। इसलिए क्रय केंद्रों पर कंप्यूटर/लैपटॉप/आईपैड, इंटरनेट समेत आवश्यक उपकरणों की उपलब्धता 10 मार्च 2020 तक और मास्टर डेटा में आवश्यक सूचनाओं की फीडिंग 12 मार्च 2020 तक पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैं।
पीसीएफ ने शुरू की डिजीटल सिग्नेचर बनाने की प्रक्रिया
मूल्य समर्थन योजना के तहत सरकारी गेहूं/धान खरीद में सबसे ज्यादा क्रय केंद्र पीसीएफ खोलती है। इसके क्रय केंद्रों को सहकारी समितियों में खोला जाता है, जहां पीएफएमएस से भुगतान की सुविधाएं न होने से धान खरीद में आरटीजीएस से भुगतान की छूट दी गई थी। जिला प्रबंधक शैलेंद्र शुक्ला ने बताया कि क्रय केंद्रों के प्रभारियों के डिजीटल सिग्नेचर बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। 15 फरवरी तक सभी कर्मचारियों के डिजीटल सिग्नेचर बना लिए जाएंगे।
गेहूं खरीद में सभी एजेंसियों को पीएफएमएस से भुगतान करना अनिवार्य कर दिया गया है। इस बार किसी एजेंसी को भी अन्य माध्यमों से भुगतान करने की छूट नहीं दी जाएगी। इसलिए सभी एजेंसियों को 15 फरवरी तक डिजीटल सिग्नेचर बनाने का काम पूर्ण कराने के निर्देश दिए गए हैैं।
रत्नाकर सिंह, एआर कोऑपरेटिव