चीनी मिलों को सरकार से सहायता राशि मिलने में अभी एक सप्ताह का और समय लग सकता हैै। सभी नौ चीनी मिलों ने 28.60 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से अपना-अपना इस्टीमेट जिला गन्ना अधिकारी को सौंप दिया है। इसके मुताबिक 260 करोड़ की डिमांड की गई है। जिला गन्ना अधिकारी ने चीनी मिलों की डिमांड को गन्ना आयुक्त के पास भेज दिया है।
कुछ दिन पूर्व ही सरकार ने तय मसौदे में ढील देकर सभी चीनी मिलों को 28.60 रुपये प्रति क्विंटल की दर से सहायता राशि देने का ऐलान किया था। इस कड़ी में जिले की नौ चीनी मिलों ने 260 करोड़ की मांग की है। बताते चलें कि चीनी मिलों ने अभी तक किसानों को 240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गन्ना मूल्य भुगतान किया है। शेष 40 रुपये के बाबत मामला सरकार और चीनी मिलों के बीच फंसा था लेकिन सरकार ने 28.60 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब चीनी मिलों को सहायता राशि देने का शासनादेश जारी कर दिया है। इससे किसानों को बकाया गन्ना मूल्य भुगतान मिलने की रास्ता साफ हो गया है पर शेष 11.40 रुपये प्रति क्विंटल की बाबत स्थिति स्पष्ट नहीं है। हालांकि विभागीय अधिकारी कहते हैं कि 11.40 रुपये की दर से चीनी मिलों को सरकार की ओर से प्रतिपूर्ति की जा चुकी है। इसके पीछे तर्क भी है कि सरकार ने चीनी मिलों को विभिन्न टैक्स, मसलन इंट्री टैक्स, परचेज टैक्स, समिति विकास कमीशन में छूट देकर भरपाई कर दी है। लिहाजा सरकार से मिलने वाली 28.60 रुपये सहायता राशि के साथ ही 11.40 रुपये का भुगतान चीनी मिलों को ही करना होगा।
चीनी मिलों पर 744 करोड़ बकाया
चीनी मिलों को मिलने वाली सहायता राशि से कुछ किसानों को आंशिक भुगतान ही किया जा सकेगा, क्योंकि नौ मेें से आठ मिलों ने अभी तक 240 रुपये प्रति क्विंटल की दर से पूर्ण भुगतान नहीं किया है। सिर्फ अजबापुर मिल ने ही 240 की दर से पूर्ण भुगतान किया है। लिहाजा नौ चीनी मिलों पर अभी भी किसानों का 744 करोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया है।