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Lakhimpur Kheri News: परिषदीय स्कूलों में कक्षा चार से आठ तक के बच्चों ने दिया नैट

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लखीमपुर खीरी। मंगलवार को कक्षा चार से आठ तक के बच्चे नैट में बैठे। परीक्षा सुबह साढ़े नौ बजे शुरू हुई। परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र-छात्राओं ने ओएमआर शीट पर अपने सवालों के जवाब दिए।
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जिले के 3106 परिषदीय प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, संविलियन विद्यालयों के कक्षा चार से आठ तक और 16 केजीबीवी विद्यालयों के कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थी शैक्षिक गुणवत्ता आंकलन के लिए आयोजित नैट में बैठे। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि परीक्षा के लिए 3,06,587 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं। इसमें 90 प्रतिशत छात्र-छात्राओं ने परीक्षा दी।
नैट 09:30 बजे से अपराह्न 11:30 बजे के मध्य संपन्न हुआ। इसके बाद पूर्वाह्न 11:30 बजे से अपराह्न दो बजे के बीच आंकलन प्रपत्रों की स्कैनिंग की गई। परीक्षा में जनपद स्तरीय समस्त अधिकारियों ने भी विभिन्न विद्यालयों का निरीक्षण किया। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने लखीमपुर और बेहजम विकास क्षेत्र के कई विद्यालयों में निरीक्षण किया।
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दूसरे चरण की नैट से छात्रों की शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार होगा। नैट में कक्षा चार और पांच में हिंदी, गणित, अंग्रेजी और पर्यावरण अध्ययन से संबंधित प्रश्न पूछे गए। कक्षा छह से आठ तक के छात्रों की हिंदी, गणित, अंग्रेजी और सामाजिक विज्ञान की परीक्षा हुई। परीक्षा परिणाम आने के बाद जिले स्तर पर स्कूलों की रैकिंग बनाई जाएगी, ताकि बच्चों के शैक्षिक स्तर में सुधार किया जा सके।


नैट : आदेश में कंपोजिट ग्रांट से पांच रुपये खर्च करने की थी अनुमति
- परीक्षा शुरू होने के बाद न लाने वालों बच्चों को पास से उपलब्ध कराए थे काले कलम
- 15 बीईओ और शिक्षकों को नहीं थी आदेश की जानकारी, स्वयं के खर्च से कराई परीक्षा
संवाद न्यूज एजेंसी
लखीमपुर खीरी। नैट यानी निपुण एसेसमेंट टेस्ट को लेकर स्कूलों को प्रति बच्चा पांच रुपये कंपोजिट ग्रांट से खर्च करने की अनुमति थी। इस खर्च से बच्चों को काले कलम खरीदकर देने थे। परीक्षा शुरू होने के बाद जिन बच्चों के पास काले कलम नहीं थे, उन्हें कलम मुहैया कराए गए, लेकिन शिक्षकों ने यह खर्च कंपोजिट ग्रांट न खर्च करते हुए खुद से वहन किया। अमर उजाला ने इस बात की पड़ताल कराई तो पता चला कि शिक्षकों के अलावा 15 बीईओ में से शायद ही किसी बीईओ को इस आदेश के बारे में जानकारी हो।
बच्चों के शैक्षिक स्तर के आंकलन को लेकर निपुण एसेसमेंट परीक्षा कराई गई। एक से तीन तक की कक्षाओं वाले बच्चों को ओएमआर शीट तो उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन बच्चों की ओएमआर शीट भरने का जिम्मा शिक्षकों पर था। कक्षा चार से आठ तक के बच्चों के लिए शासन की ओर से काले कलम खरीदकर देने के निर्देश थे।
इतना ही नहीं स्कूलों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को परीक्षा के दौरान कुछ दूरी पर बैठाने के भी निर्देश थे, लेकिन स्कूलों में ऐसा होता नहीं दिखा। एक-एक सीट पर चार से पांच बच्चे बैठे मिले थे। पड़ताल के दौरान कुछ जगहों पर शिक्षक ही बच्चों की ओएमआर शीट भरते हुए देखे गए। एक शिक्षक ने बताया कि उन्हें बच्चों को कलम खरीद कर देने के लिए ग्रांट से खर्च की अनुमति की कोई जानकारी नहीं थी। लिहाजा तमाम बच्चों को खुद के खर्च से कलम मंगाकर दिया गया।




कहीं फर्जी बिल बाउचर से मद हड़पने की तो नहीं हो रही साजिश

शिक्षक से लेकर बीईओ तक कंपोजिट ग्रांट से इस परीक्षा में खर्च को लेकर जिस तरह से अनभिज्ञता जता रहे हैं। उससे एक बात तो तय है कि कहीं न कहीं विभाग में फर्जी बिल बाउचर लगाकर मद को इस खर्च में दिखाने की साजिश रची जा रही है। चूंकि आदेश परीक्षा से करीब दस दिन पहले आया था। इसके बाद भी अगर बीईओ से लेकर शिक्षकों को इस बात की जानकारी न हो तो कहीं न कहीं सभी की मिलीभगत होने की बात सामने आ रही है।




बीएसए बोले- स्कूलों की धनराशि, जहां सही हो वहां करें खर्च

शिक्षकों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त बोझ न पड़े इसको लेकर परीक्षा से कुछ दिन पहले ही महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने जिले के सभी स्कूलों को मिलने वाली ग्रांट से प्रति बच्चा पांच रुपये खर्च करने का आदेश दिया था। इस आदेश के बारे में बीईओ से लेकर जिले के शिक्षक तक अनभिज्ञ थे। बीएसए प्रवीण कुमार तिवारी ने बताया कि कंपोजिट ग्रांट स्कूलों को दी जाती है। स्कूल इंचार्ज कलम न खरीदकर इस मद को स्कूल के हित में कहीं भी खर्च कर सकते हैं।
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