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बाघ की निगरानी के लिए जीपीएस सिस्टम से लैस लगाए गए छह कैमरे

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मोटरबोट से पहुंची वन विभाग की टीम। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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धौरहरा (लखीमपुर खीरी)। चकदहा गांव के मजरा चमारनपुरवा निवासी 12 वर्षीय बालक को शिकार बनाने वाले बाघ की वन विभाग ने निगरानी तेज कर दी है। शुक्रवार को नाव से करीब आठ किमी शारदा नदी और तीन किलोमीटर पैदल चलकर चकदाह पहुंची टीम के पसीने छूट गए। रेंजर ने टीम के साथ घटनास्थल का निरीक्षण किया और चिह्नित किए गए स्थानों पर पेड़ के सहारे छह कैमरे लगा दिए। उन्होंने ग्रामीणों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
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गांव चकदहा के मजरा चमारनपुरवा निवासी बृजेश (12) को बाघ 14 सितंबर को उठा ले गया था। अगले दिन उसका अधखाया शव मिला था। घटना के तीन दिन बाद भी जब किसी विभागीय अफसर ने मौके पर पहुंचने की जहमत नहीं उठाई तो अमर उजाला ने शुक्रवार के अंक में ग्रामीणों की इस पीड़ा को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इस पर चेते वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह शुक्रवार को टीम के साथ सुबह सात बजे मोटर बोट से घाघरा नदी में करीब आठ किलोमीटर का सफर तय कर रेत में तीन किलोमीटर पैदल चलने के बाद चकदहा गांव पहुंचे, जहां उन्होंने ग्रामीणों से पूछताछ की और चिह्नित जगहों पर कैमरे लगाए। ग्रामीणों को वन क्षेत्र में अकेले न जाने की सलाह दी। गांव में पोस्टर चस्पा कर लोगों को सतर्क रहने के निर्देश दिए। वनक्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने बताया कि चमारनपुरवा गांव के बाहर, गन्ने के खेतों और पेड़ों पर जीपीएस युक्त छह कैमरे लगाए गए हैं। लगातार बाघ की निगरानी की जा रही है। ग्रामीणों में बाघ की जबरदस्त दहशत है। अधिकतर लोग शाम होते ही घरों में कैद हो जाते हैं।
गांव में शौचालय न होने पर रेंजर ने सीडीओ को भेजा पत्र
चकदाह गांव में किशोर पर बाघ के हमले की घटना को वन विभाग के अफसरों ने भी गंभीरता से लिया है। वन क्षेत्राधिकारी अनिल शाह ने डीएफओ के माध्यम से सीडीओ को पत्र भेज कर चकदाह गांव में एक भी शौचालय न होने की जानकारी दी। कहा कि यदि शौचालय होते तो महिलाएं व ग्रामीण खेत पर शौच को नहीं जाते और किशोर की जान बाघ के हमले में न जाती। उन्होंने गांव में पात्रों के शौचालय बनवाने का अनुरोध किया है।
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