नवंबर के बाद एक फिर नोटबंदी जैसे हालात
शादी विवाह के जश्न पर ग्रहण, व्यापार पर भी असर
जिले भर में एक फिर नोट बंदी जैसे हालात पैदा हो गए हैं। बैंकों में कैश की किल्लत से लोगों को अपनी जरूरत के लिए पैसा नहीं मिल पा रहा है। 95 फीसदी एटीएम ड्राई हैं। किसी पर नो कैश का बोर्ड लटक रहा है तो किसी का शटर डाउन है। शहर में इक्का दुक्का जो एटीएम चल भी रहे हैं वहां लोगों को घंटों कड़ी धूप में लाइन में लगना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्र की बैंकों में तो रोज ही हंगामा और झगड़े की नौबत आ रही है।
शादी विवाह के इस सीजन में लोगों को पैसों की जरूरत है लेकिन बैंकों में कैश नहीं हैं। इससे लोगों को शादी विवाह आदि मांगलिक कार्यों में आने वाले मेहमानों के स्वागत सत्कार में भी दिक्कतें आ रही हैं। लोगों के खातों में पर्याप्त धन होने के बाद भी जेब से कंगाल हैं। यहां तक कि दवा इलाज के लिए भी पर्याप्त पैसा मिल पाना मुश्किल हो रहा है। बड़ी खरीद तो स्वाइप मशीनों के जरिए हो रही है लेकिन आम जरूरत की चीजों के लिए कैश की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
किसानों के गन्ने का भुगतान बैंक खातों में हैं लेकिन खाद बीज और खेती बाड़ी की अन्य जरूरतों के लिए पैसा नहीं मिल पा रहा है। बैंकों से कैश कम होने की बात कहकर लोगों को लौटाया जा रहा है। ग्रामीण इलाके की बैंकों का तो यह हाल है कि लोगों को दस-बीस हजार रुपये भी एक साथ मिलना मुश्किल हो रहा है। दस हजार की मांग करने पर उन्हें दो-ढाई हजार रुपया थमाया जा रहा है।
बैंक प्रबंधकों का कहना है कि रिजर्व बैंक से कैश न मिल पाने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। बैंक में जो डिपॉजिट आ रहा है उसी से किसी तरह भुगतान का काम चलाया जा रहा है। कैश न होने से एटीएम बंद पड़े हैं। बैंक और एटीएम में कैश न होने से व्यापार पर भी बुरा असर पड़ना शुरू हो गया है। यदि यही हाल रहा तो लोगों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो जाएगा।
रिजर्व बैंक से कैश न मिलने के कारण बैंकों में कैश की कमी पैदा हुई है। कैश की कमी के कारण ही एटीएम नहीं चल पा रहे हैं। समस्या बड़ी है लेकिन जल्दी ही स्थिति में सुधार आएगा।
एके द्विवेदी, लीड बैंक मैनेजर, लखीमपुर खीरी।