योजनाएं लागू होने से सुधार तो हुआ, लेकिन नहीं बदली शहर की तस्वीर
शहरी विकास मंत्रालय की स्वच्छता ग्रेडिंग में अपना शहर लखीमपुर एक बार फिर से गंदा मिला है। इसमें एक तरफ जहां नगर पालिका परिषद के अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही सामने आई हैं, वहीं योजनाओं का सही क्रियान्वयन न कर पाने की बात भी उजागर हुई है। हालांकि रैकिंग में पीछे रह जाने के मामले में शहरवासी भी कम जिम्मेदार नहीं। यदि शहर के लोग स्वच्छता के प्रति थोड़ा सा जागरूक होते, तो शायद शहर की रैकिंग कुछ और बेहतर होती।
शहरी विकास मंत्रालय ने स्वच्छता सर्वेक्षण 2017 की जो सूची जारी की है उसमें लखीमपुर शहर की रैकिंग 410 है, जो पिछली बार से बेहतर है। हालांकि हम आसपास के जिलों से आगे हैं। पालिका प्रशासन के प्रयासों को शहरवासी का बेहतर साथ नहीं मिला, जिससे शहर को और अच्छी रैकिंग नहीं मिल सकी। इसमें पिछड़ने का कारण पालिका कर्मचारियों की उदासीनता और शहर वासियों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता का अभाव भी है।
शहर को साफ सुथरा रखने के लिए पालिका प्रशासन ने डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन से लेकर लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक करने के लिए जगह जगह पर होर्डिंग्स भी लगवाई, इसके बावजूद शहर को स्वच्छ नहीं बनाया जा सका। शहर में नगर पालिका के पास़ 153 स्थाई कर्मचारी, 111 संविदा कर्मी और 301 ठेका कर्मचारी है। सफाई व्यवस्था का मासिक बजट 81 लाख 36 हजार 139 रुपया है। सफाई व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में सफाई कर्मियों की कम संख्या आड़ आ रही है। नगर पालिका क्षेत्र में कुल मौजूदा समय में 27 वार्ड हैं। इनके लिहाज से सफाई कर्मियों की संख्या काफी कम है।
शहर को साफ सुथरा बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं, इसी की बदौलत रैकिंग में सुधार हुआ है। जो कमियां रह गई है उन्हें शहर वासियों के सहयोग से उसे दूर किया जाएगा, जिससे अगली बार शहर साफ शहरों की टॉप फाइव सूची में शामिल हो सके।
डॉ.इरा श्रीवास्तव, पालिका अध्यक्ष
कमियों को किया जाएगा दूर
शहर वासियों और पालिका कर्मचारियों के सहयोग से रैकिंग सुधरी है, लेकिन जो कमियां रह गई हैं उन्हें जल्द ही दूर किया जाएगा। जिससे अगली बार हम नंबर एक पर पहुंच सके।
अवनींद्र कुमार, ईओ