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एक कार्र्य के लिए दो संस्थाओं के टेंडर

Wed, 18 Mar 2015 07:01 PM IST
लखीमपुर खीरी
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कार्यदायी संस्थाओं की ओर से कराए जा रहे निर्माण कार्य के प्रस्तावों में बड़ा झोल सामने आया है, जिसमें एक कार्य के लिए दो संस्थाओं ने अलग-अलग प्रस्ताव बनाकर टेंडर प्रक्रिया करा दी। बार्डर एरिया डेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत स्वीकृत रपटा पुल के निर्माण के लिए खीरी सांसद अजय मिश्र टेनी ने प्रस्ताव दे दिया। इसी तरह गांव बनवीरपुर में एक मार्ग पर इंटरलॉकिंग कार्य के लिए जिला पंचायत और सांसद ने अपनी निधि से प्रस्ताव दिया। एई आरसी गुप्ता ने जब स्थलीय निरीक्षण किया, तो मामले का खुलासा हुआ।
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निघासन क्षेत्र के गांव खैरटिया में बार्डर एरिया डेवलपमेंट कार्यक्रम से रपटा पुल 2014 में स्वीकृत हुआ था। इसी क्षेत्र के गांव बनवीरपुर में जिला पंचायत से 320 मीटर लंबाई में इंटरलॉकिंग सड़क बनाने का प्रस्ताव पास हुआ था। रपटा पुल पर निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका, लेकिन कार्यदायी संस्था ग्रामीण अभियंत्रण विभाग ने टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली, जबकि जिला पंचायत की ओर से इंटरलॉकिंग सड़क निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिस पर 50 फीसदी कार्य भी हो चुका है। इसके बाद दिसंबर 2014 में खीरी सांसद अजय मिश्र टेनी ने सांसद निधि से रपटा पुल और इंटरलॉकिंग सड़क बनाने का प्रस्ताव डीआरडीए को दिया। इसके बाद सांसद निधि से कार्यों के लिए भी टेंडर प्रक्रिया कराई गई। इस दौरान भी अधिकारियों को भनक नहीं लग सकी। बनवीरपुर गांव में इंटरलॉकिंग कार्य शुरू कराने के लिए डीआरडीए के एई आरसी गुप्ता ने स्थलीय निरीक्षण किया तो वहां पर इंटरलॉकिंग का कार्य पहले से चलता पाया। इसके बाद रपटा पुल के मामलेे की जांच कर्राई गई, तो उसमें भी स्थिति ऐसी ही निकली। इस गड़बड़ी से अधिकारियों में अफरा तफरी मच गई।
सीडीओ नितीश कुमार ने बताया कि संबंधित विभागों के बीच समन्वय में कमी के चलते एक ही कार्य के लिए दो-दो प्रस्ताव हुए थे। सांसद निधि से प्राप्त प्रस्तावोें को निरस्त कर दिया गया, जिनके स्थान पर नए प्रस्ताव शामिल किए जाएंगे। संबंधित विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं।
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कार्यदायी संस्थाओं से एनओसी लेना अनिवार्य
इस मामले का खुलासा होने पर सीडीओ नितीश कुमार ने संबंधित विभागों को गाइड लाइन जारी कर दी हैै, जिसके मुताबिक अब किसी भी निर्माण कार्य की स्वीकृति से पहले समस्त कार्यदायी संस्थाओं से संबंधित विभागों को एनओसी लेना अनिवार्य होगा। खासकर विधायक और सांसद निधि से प्राप्त होने वाले प्रस्तावों की गहनता से जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं।
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