धनगढ़ी-कैलाली भंसार कार्यालय और बाहर खड़े ट्रक। संवाद
गौरीफंटा/धनगढ़ी (नेपाल)। नेपाल सरकार की ओर से विदेशों से आयात होने वाले सामान पर खुदरा मूल्य (एमआरपी) लेबल अनिवार्य किए जाने के बाद सीमावर्ती भंसार कार्यालयों में हड़कंप मच गया है।
कैलाली और कंचनपुर समेत कई कस्टम प्वाइंट पर काम प्रभावित होने से भारत से आने वाले मालवाहक वाहन सीमा पर कतारों में खड़े हो गए हैं। कैलाली भंसार कार्यालय के सूचना अधिकारी प्रकाश तिमिलसिना ने बताया कि वाणिज्य आपूर्ति तथा उपभोक्ता संरक्षण विभाग ने 13 अप्रैल को आदेश जारी कर कहा था कि बिना एमआरपी लेबल वाले सामान का भंसार पास नहीं किया जाएगा।
व्यापारियों को तैयारी के लिए 15 दिन का समय दिया गया था, जिसकी अवधि 28 अप्रैल को समाप्त हो गई। अब बिना लेबल वाले सामान का क्लीयरेंस रोका जा रहा है। कंचनपुर जिले में भी यही स्थिति बनी हुई है। वहां के सूचना अधिकारी चक्र देव भट्ट ने बताया कि उपभोक्ता संरक्षण नियमों के तहत आयातित सामान पर अंग्रेजी, नेपाली या हिंदी भाषा में खुदरा मूल्य अंकित होना अनिवार्य है।
नियम के सख्ती से पालन के कारण आयात प्रक्रिया प्रभावित हो गई है। सीमा पर ट्रकों की लंबी कतार लगने से स्थानीय बाजारों में सामान की कमी की आशंका जताई जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी और बाजार में किल्लत की स्थिति बन सकती है।