एक तरफ गन्ना सीजन शुरू होने के साथ ही चीनी मिलों मेें बिजली का उत्पादन शुरू हो गया है, वहीं दूसरी तरफ यहां के लोगों को बिजली किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। एक आंकड़े के मुताबिक जिले में करीब 65 से 70 मेगावॉट बिजली बनाई जा रही है, लेकिन यहां बन रही बिजली की खपत जिले में नहीं हो रही है। नतीजतन यहां बिजली सप्लाई के समय में भी कटौती की जा रही है।
लखीमपुर डिवीजन में निजी क्षेत्र की खंभारखेड़ा और ऐरा शुगर मिल में बिजली का उत्पादन हो रहा है। खंभारखेड़ा में 90 मेगावॉट बिजली उत्पादित करने की इकाई लगी है। लेकिन यहां से सिर्फ 10 से 12 मेगावॉट बिजली ही बिजली विभाग के फीडर को दी जाती है, जबकि शेष बिजली की खपत चीनी मिल में ही की जा जाती है। ऐरा शुगर मिल में 25 से 30 मेगावॉट बिजली का उत्पादन किया जा रहा है लेकिन करीब 10 मेगावॉट बिजली ही विभागीय फीडर को मिल पा रही है। इसी तरह गोला डिवीजन की पलिया चीनी मिल से 10 से 12 मेगावॉट, गुलरिया से 18 मेगावॉट और अजबापुर मिल से करीब 15 मेगावॉट बिजली ग्रिड को दी जा रही है। बाकी बिजली की खपत चीनी मिल में की जाती है। वहीं दूसरी तरफ सर्दी के मौसम में जिले में बिजली सप्लाई एक घंटा कम कर दी गई है। गांवों में भी 10 के बजाए सिर्फ नौ घंटे ही बिजली मिल पा रही है। लोगों का कहना है कि जिले में बिजली उत्पादन के बावजूद उन्हें बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है।
अधिशासी अभियंता गोला डिवीजन उमेश चंद सोनकर ने बताया कि मौजूदा समय में चीनी मिलों में करीब 70 मेगावॉट बिजली का उत्पादन हो रहा है, लेकिन बिजली की सप्लाई नेशनल ग्रिड में की जा रही है। जिसकी वजह से इसका जिले को कोई फायदा नहीं होता है। यहां सिस्टम कंट्रोल से निर्धारित रोस्टर के मुताबिक ही बिजली सप्लाई करने का निर्देश दिया गया है।