लखीमपुर खीरी। स्लीपर बसों और स्कूली वाहनों में अब फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम (एफडीएसएस) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है।
परिवहन विभाग ने स्कूल संचालकों और ट्रांसपोर्टरों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि बिना इस सिस्टम के वाहनों का संचालन नहीं होने दिया जाएगा।
परिवहन विभाग के आरआई संजय कुमार ने बताया कि यह सिस्टम इंजन कंपार्टमेंट, बैटरी एरिया और अन्य संवेदनशील हिस्सों में लगे हीट सेंसर के जरिये काम करता है।
तापमान अचानक बढ़ने या धुआं होने पर सेंसर तीन से दस सेकंड के भीतर सक्रिय हो जाता है। ड्राइवर के पास अलार्म बजता है और डैशबोर्ड पर चेतावनी संकेत जलने लगता है।
सिस्टम से जुड़े फायर सप्रेशन सिलिंडर में भरी विशेष केमिकल गैस पाइप के माध्यम से आग वाले हिस्से तक पहुंचकर उसे नियंत्रित कर देती है, जिससे आग फैलने से रोकी जा सके।
आपात स्थिति में इमरजेंसी लाइटिंग भी स्वतः चालू हो जाती है। सोमवार को फिटनेस जांच के दौरान स्लीपर बसों की भी जांच की गई। छह बसों में यह सिस्टम नहीं पाया गया, जिनके संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। आगे भी अनुपालन न होने पर सीज की कार्रवाई की जाएगी। इसको लेकर संबंधितों को निर्देश भी जारी किए जा चुके हैं। पालन न होने पर कड़ी कार्रवाई के लिए कहा गया है।