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भाभी-भतीजी को घायल कर देवर ने लगाई फांसी

Thu, 02 Jul 2015 10:40 PM IST
निघासन (लखीमपुर खीरी)।
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पट्टे की जमीन में हिस्सा न देने से गुस्साए गांव हथियाबोझ निवासी एक व्यक्ति ने अपनी भाभी और भतीजी को बांके से ताबड़तोड़ प्रहार कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। बाद में भाभी-भतीजी को मरा हुआ समझकर देवर ने एक पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। महिला को बचाते समय उसकी दूसरी बेटी को भी चोट लगी है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेजा है। वहीं दोनों घायलों को सीएचसी से जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। सीओ मोहम्मद इब्राहिम ने भी मौका मुआयना किया।
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ग्राम पंचायत दरेरी के मजरा हथियाबोझ निवासी मुरली के दो बेटे घनश्याम और केशवराम यादव थे। 10 बीघा पैतृक भूमि होने के कारण राजस्व विभाग ने दो एकड़ भूमि का पट्टा घनश्याम के नाम कर दिया। पिता की मौत के बाद दोनों भाइयों ने बटवारा कर लिया। छह साल पहले घनश्याम की और पांच साल पहले केशवराम (52) की पत्नी केतकी की मौत हो गई। घनश्याम की मौत के बाद उसकी पत्नी धनवंती उर्फ गुड्डी के नाम पट्टे की भूमि आ गई। केशवराम पट्टे की भूमि में आधा हिस्सा चाहता था, लेकिन धनवंती ने भूमि देने से इंकार कर दिया। लिहाजा गुरुवार सुबह करीब चार बजे केशवराम बांका लेकर अपनी भाभी धनवंती के घर जा धमका और मच्छरदानी में सो रही 45 वर्षीय धनवंती के ऊपर ताबड़तोड़ प्रहार करना शुरू कर दिए। इस हमले में धनवंती के पास में सो रही आठ वर्षीय बेटी शिवानी भी गंभीर रूप से घायल हो गई। चीख-पुकार सुनकर पड़ोस में सो रही धनवंती की बड़ी बेटी उर्मिला जाग गई। उसने शोर मचाते हुए अपनी मां को बचाने का प्रयास किया। मां को बचाने के दौरान हाथ में बांका लगने से उर्मिला भी घायल हो गई। दोनों मां-बेटी को मरा हुआ समझकर पड़ोसियों के आने से पहले केशवराम वहां से भाग गया और बड़े भाई घनश्याम के खेत में गमछे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। सीओ मोहम्मद इब्राहिम और एसओ परशुराम ने मौके पर जाकर निरीक्षण किया और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा।

दो दिन पहले हुआ था झगड़ा
पट्टे की जमीन में हिस्सा मांगने को लेकर दो दिन पहले केशवराम और धनवंती के बीच झगड़ा हुआ था। इसके बाद केशवराम ने अपनी भाभी को मारने का ताना-बाना बुना था, जिस कड़ी में गुरुवार की सुबह उसने वारदात को अंजाम दे दिया।
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छह बच्चों के परवरिश की जिम्मेदारी
हमले में घायल हुई धनवंती के कंधों पर छह बच्चों के भरण पोषण की जिम्मेदारी हैै। छह बच्चों में चार लड़कियां और दो लड़के हैैं, जिसमें एक बेटी की शादी हो चुकी है।

केशवराम की मौत से अनाथ हुआ परिवार
निघासन। गांव हथियाबोझ निवासी केशवराम के आत्महत्या करने के बाद उसका परिवार अनाथ हो गया है। उसकी पांच संतानों में उसकी एक बेटी नेत्रहीन है। लिहाजा परिवार की परवरिश का जिम्मा उसके बड़े बेटे रमेश पर आ गया है। उधर, अस्पताल में धनवंती और उसकी मासूम बेटी शिवानी जिंदगी और मौत से जूझ रही है।
गांव हथियाबोझ निवासी केशवराम के तीन पुत्र रमेश (20), उमेश (15), भगवानी (12) तथा दो बेटियां धरमा (16) और मीरा (12) हैं। भूमि कम (करीब पांच बीघा) होने के कारण केशवराम मेहनत मजदूरी करके अपने पूरे परिवार का पेट पालता था। धरमा की आंखों में रोशनी लाने के लिए उसने काफी इलाज कराया, लेकिन वह सही नहीं हुई। पांच साल पहले केशवराम अपनी पत्नी केतकी की टीबी से मौत के बाद पूरी तरह से टूट गया था।

घायल धनवंती के बेटे प्रमोद की तहरीर पर मृतक केशवराम के खिलाफ हत्या के प्रयास की रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। केशवराम के हमला करने का कारण भूमि के विवाद का मामला जांच में सामने आया है।
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- मोहम्मद इब्राहिम, सीओ
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