42 में से एक भी परियोजना नहीं हो सकी लागू
पांच हेक्टेयर तालाब सुधार का प्रस्ताव पर मिला नहीं एक धेला
मत्स्य पालन को बढ़ावा देकर लोगों को रोजगार से जोड़ने के लिए शुरू हुई नीली क्रांति योजना एक कदम आगे नहीं बढ़ सकी है। योजना के तहत 42 तरह की परियोजनाओं को लागू कर मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाना है, लेकिन वित्तीय वर्ष 2016-17 में एक भी परियोजना लागू नहीं कराई जा सकी है। विभाग ने सिर्फ पांच हेक्टेयर तालाब का सुधार कराने के लिए प्रस्ताव शासन को भेजा था, लेकिन बजट न मिलने से यह काम भी नहीं हो सका है।
सेंट्रल सेक्टर स्कीम की नीली क्रांति के तहत इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट ऑफ फिशरीज योजना में 42 परियोजनाएं शामिल हैं, जिसका पूर्णता संचालन 2016-17 से किया गया है। खास यह है कि इसमें परियोजना की कुल लागत में से 75 फीसदी धनराशि लाभार्थी को अनुदान के तौर पर मिलनी है। शेष 25 फीसदी धनराशि लाभार्थी स्वयं व्यय करेगा। मसलन चार लाख की परियोजना पर केंद्र से 50 फीसदी (दो लाख) और प्रदेश सरकार से 25 फीसदी (एक लाख) रुपये अनुदान मिलेगा। सत्र बीतने में करीब एक माह का समय शेष है, लेकिन कोई काम न होने से नीली क्रांति योजना को इस जिले में पहले साल ही झटका लगा है। सहायक निदेशक मत्स्य के मुताबिक पांच हेक्टेयर तालाब सुधार के लिए 22 लाख का प्रस्ताव शासन को भेजा था, जहां प्रस्ताव स्वीकार हो चुका है। धनराशि अभी तक प्राप्त न होने से कार्य शुरू नहीं कराया जा सका है।
नए सत्र में भेजे कई परियोजनाओं के प्रस्ताव
आगामी वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए मत्स्य विभाग ने करीब 34 लाख लागत वाले कार्यों के प्रस्ताव भेजें हैं। सहायक निदेशक मत्स्य अमरेश चंद्र श्रीवास्तव ने बताया कि पांच हेक्टेयर में तालाब सुधार, दो हेक्टेअर निजी भूमि पर तालाब निर्माण, फिश फीड मिल लगाने, पांच इंसुलेटेड बाइक का प्रस्ताव गया है।
फैक्ट फाइल.....
कुल तालाब (राजस्व) 5187
क्षेत्रफल 3635.73
मत्स्य पालन को आवंटित तालाब 1584