एक ट्रैक्टर ट्राॅली में लादी जा रही सड़क किनारे की मिट्टी। संवाद
पलियाकलां। पलिया बाइपास से दुधवा तिराहे तक चल रहे इंटरलॉकिंग चौड़ीकरण कार्य ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। विकास के नाम पर खोदी जा रही सड़क के किनारे की मिट्टी अब जिम्मेदारों की जेबें भरने का जरिया बन गई है।
इंटरलॉकिंग की दीवार की हद बनाने के लिए और जमीन को समतल करने के लिए जो मिट्टी निकाली जा रही है। उसे दिन में किनारे ही स्टोर किया जाता है। रात होते ही सड़कों पर ट्रैक्टर ट्रालियों की गड़गड़ाहट गूंजने लगती है। बताया जा रहा है कि रात के अंधेरे का फायदा उठाकर इस सरकारी मिट्टी को निजी लोगों को बेचा जा रहा है। लोगो में इस बात को लेकर रोष है कि जिस मिट्टी का उपयोग सार्वजनिक कार्यों या सड़क में होना चाहिए था। उसे निजी लाभ के लिए क्यों बेचा जा रहा है।
महत्वपूर्ण मार्ग पर हो रहे इस खेल ने विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि शहर की नाक के नीचे रात में ट्रालियां इस मिट्टी को भरकर गुजरती हैं। दो मीटर चौड़ी इस इंटरलॉकिंग के चौड़ीकरण कार्य में मानक और पारदर्शिता को ताक पर रखकर काम किए जाने के आरोप लग रहे हैं। खोदाई से निकलने वाली मिट्टी की मात्रा और उसके निस्तारण का कोई रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं है।
लगे कैमरों की हो जांच तो सच आ जाएगा सामने
लोगों का कहना है कि मिट्टी बेची जा रही है। सीओ ऑफिस से पलिया मांटेसरी स्कूल के आसपास लगे सीसी टीवी कैमरों की जांच की जाए तो पूरा सच सामने आ जाएगा।
वर्जन
ठेकेदार से बात कर उसे सख्त चेतावनी दी गई है। इसकी जांच की जाएगी।
एसपी सिंह,जेई पीडब्ल्यूडी,