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भाजपा-सपा की लड़ाई... बसपा हाशिए पर आई

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लखीमपुर खीरी। भाजपा-सपा की चुनावी जंग में सबसे ज्यादा नुकसान बसपा को हुआ है। बसपा ने 2017 के चुनाव में पूरे जिले की आठों सीटों पर कुल 4,00,564 वोट हासिल किये थे, जो इस बार 2,19,638 कम हो गए। इस बार पिछले चुनाव के मुकाबले बसपा को सिर्फ 1,80,926 वोटों से ही संतोष करना पड़ा।
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बसपा के कैडर वोटों के भाजपा की ओर मुड़ने से इसका सीधा फायदा भाजपा को मिला है। इस विधानसभा चुनाव में बसपा ने आठों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे मगर एक भी सफल नहीं हो सका। वर्ष 1996 के बाद बसपा यह सबसे खराब प्रदर्शन है। बसपा उम्मीदवारों के समर्थन में न तो बसपा सुप्रीमो मायावती ने और न ही बसपा के किसी शीर्ष नेता ने जिले में चुनावी सभा की। इससे बसपा प्रत्याशियों में हताशा भी दिखी।
पलिया - पलिया विधानसभा क्षेत्र में बसपा उम्मीदवार डॉ. जाकिर हुसैन को 27849 वोट मिले हैं। वर्ष 2012 के चुनाव में उन्हें 55460 वोट मिले थे, जबकि 2017 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार डॉ. वीके अग्रवाल 43436 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इन तीन चुनावों में इस बार बसपा के वोटों में सबसे ज्यादा गिरावट आई है।
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निघासन - निघासन में बसपा उम्मीदवार आरए उस्मानी को सिर्फ 15392 वोट मिले हैं। जबकि 2012 के चुनाव में बसपा के दरोगा सिंह को 35798 वोट मिले थे और वह तीसरे स्थान पर रहे थे। वहीं 2017 के चुनाव में भी बसपा के जीएस सिंह 40674 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। निघासन में 2012 से पहले भी बसपा अपना सिक्का जमा चुकी है। 2002 के विधानसभा चुनाव में आरएस कुशवाहा निघासन से बसपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक बने थे। 2002 के चुनाव में 44367 यानि 26.18 फीसदी वोट मिले थे।
गोला - गोला विधानसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी शिखा कनौजिया को 26970 वोट मिले हैं। 2012 के चुनाव में बसपा की सिम्मी बानो 63110 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहीं थी, जबकि 2017 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी वृज स्वरूप कनौजिया को 51542 वोट मिले थे। इस तरह देखें तो 2012 के चुनाव से बसपा के वोटों में लगातार गिरावट आई है। इससे पहले हैदराबाद सीट पर एक बार भी बसपा उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत पाए थे।
श्रीनगर- श्रीनगर में बसपा प्रत्याशी मीरा बानो को 23091 वोट मिले हैं। जबकि 1996 से श्रीनगर में बसपा मजबूत स्थिति में रही है। 1996 में पहली बार इसी सीट से माया प्रसाद बसपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक बनी थीं। उस चुनाव में उन्हें 45921 वोट मिले थे। इसके बाद 2002 में भी वह 41735 वोट पाकर बसपा से विधायक बनीं और उन्हें प्रदेश मंत्रिमंडल में जगह मिली। 2012 के चुनाव में बसपा प्रत्याशी श्रीपाल भार्गव 37898 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। 2017 के चुनाव में बसपा के प्रवीण भार्गव को 44757 वोट मिले थे।
लखीमपुर सदर - लखीमपुर सदर सीट पर बसपा उम्मीदवार मोहन बाजपेई को मजबूत उम्मीदवार माना जा रहा था लेकिन वह 24014 वोटों में ही सिमटकर रह गए। जबकि 2012 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार ज्ञान प्रकाश बाजपेई 44270 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। 2017 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार शशिधर मिश्र उर्फ नामे महाराज 39068 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रह गए। यहां भी 2012 के बाद से बसपा के वोट बैंक में गिरावट दर्ज की जा रही है।
धौरहरा - धौरहरा विधानसभा क्षेत्र में बसपा उम्मीदवार आनंद मोहन त्रिवेदी को इस चुनाव में महज 16122 वोट मिले हैं। 2012 में यहां से बसपा के शमशेर बहादुर सिंह चुनाव जीते थे उस चुनाव में उन्हें 64143 वोट मिले थे। जबकि 2017 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार शमशेर बहादुर 54634 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इससे पहले 2007 में इसी सीट से बसपा के टिकट पर बाला प्रसाद अवस्थी विधायक बने थे। उस चुनाव में उन्हे 80690 वोट मिले थे।
कस्ता - कस्ता विधानसभा क्षेत्र में बसपा प्रत्याशी हेमवती राज को मात्र 16344 वोट मिले हैं। जबकि 2012 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार सौरभ सिंह सोनू 61677 वोट पाकर दूसरे स्थान पर रहे थे। 2017 के चुनाव में बसपा उम्मीदवार राजेश गौतम 41778 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। मोहम्मदी में बसपा प्रत्याशी शकील सिद्दीकी को 31144 वोट मिले हैं। 2012 में इसी सीट से बसपा के बाला प्रसाद अवस्थी 57737 वोटों के साथ चुनाव जीतकर विधायक बने थे। 2017 में दाउद अहमद 57902 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे।
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