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प्रशासन चिंतित: कोरोना काल में बर्ड फ्लू की आशंका ने और बढ़ाई मुसीबत

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एक दुकान पर बिक्री के लिए रखे मुर्गे। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
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लखीमपुर खीरी। कोरोना वायरस का खतरा अब भी बना हुआ है। ऐसे में बर्ड फ्लू की आशंका ने दहशत और बढ़ा दी है। फिलहाल जिले में सब कुछ ठीकठाक है, मगर पशु चिकित्सक पूरी सतर्कता बरत रहे हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी ने भी एहतियातन मुर्गी पालन केंद्रों का निरीक्षण कराने के साथ चूना एवं ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराना शुरू कर दिया है।
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पशु चिकित्सकों का कहना है कि सावधानी बरतकर बर्ड फ्लू से बचा जा सकता है। इसके लिए जरूरी है यदि कहीं पर एक साथ तमाम पक्षी मर जाएं तो इसके बारे में तुरंत पशु चिकित्सक को सूचना दें, जिससे मृत पक्षी के शव को आईवीआरआई बरेली भेजकर उसकी जांच कराई जा सके। इसी के साथ मुर्गी पालन केंद्र पर किसी भी बाहरी व्यक्ति को प्रवेश न करने दें। जिस जगह पर मुर्गियों को रखा गया हो उसके गेट के सामने चूना एवं ब्लीचिंग पाउडर पर्याप्त मात्रा में छिड़क दे। मुर्गियों को दाना पानी देने के लिए सुरक्षित कपड़े एवं दस्ताने पहनकर जाएं। जमीन पर पड़े चूने एवं ब्लीचिंग पाउडर में जूता व चप्पल रगड़ लें, जिससे इसके माध्यम से कोई वायरस मुर्गियों के पास न पहुंचने पाए। इस तरह सावधानी बरतकर बर्ड फ्लू के प्रकोप से बचा जा सकता है।
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बाजार में मुर्गे का भाव
देसी मुर्गा- 300 रुपये
ब्यालर मुर्गा- 80 रुपये
कड़कनाथ- 1200 से 1500
( शुक्रवार को जिन्दा मुर्गे के रेट प्रति किलो)
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ये बरतें सावधानी
-अचानक एक साथ कई पक्षियों की मौत होने पर अलर्ट हो जाएं। समीप के पशु अस्पताल में सूचना दें।
-पोल्ट्री फार्म पर किसी बाहरी को न आने दें।
-प्रवेश द्वार पर चूना व ब्लीचिंग पाउडर डलवाएं।
-ब्लीचिंग पाउडर, चूना एवं परसलीन टीएच को पानी में मिलाकर छिड़काव कराएं।
- जिन प्रदेशों में बर्ड फ्लू फैला है वहां से चूजे न लें।
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बर्ड फ्लू के लक्षण
सांस लेने में दिक्कत, हमेशा कफ बना रहना, सिर दर्द, नाक बहना, गले में सूजन, मसल्स में दर्द, उल्टी महसूस होना, पेट के निचले हिस्से में दर्द।
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इस तरह फैलता है बर्ड फ्लू
मनुष्य में यह बीमार मुर्गियों या फिर संक्रमित पक्षियों के बेहद निकट रहने से फैलता है। बर्ड फ्लू का वायरस आंख, नाक और मुंह के माध्यम से प्रवेश करता है।
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इस तरह करें बचाव
बर्ड फ्लू का कारण एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है। यह पक्षियों के साथ इंसानों को भी प्रभावित करता है। इसलिए बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। चिकन व अंडे के प्रयोग के लिए घर में अच्छी तरह पकाकर खाएं। इसके लिए खौलते पानी में चिकन को उबालकर अच्छी तरह पकाएं। कच्चे अंडे की जगह उबले अंडे का प्रयोग करें।
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बर्ड फ्लू को लेकर बेहद सतर्कता बरती जा रही है। रोजाना मुर्गी पालन केंद्र का निरीक्षण कर चूना, ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जाता है। वहीं हर माह करीब 40 सैंपल आईवीआरआई बरेली भेजकर जांच कराई जाती है।
-डॉ. राजेंद्र कुमार, पशु चिकित्सक
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जिले में लखनऊ, गोरखपुर सहित अन्य जगहों पर चूजे आते हैं। मगर, बर्ड फ्लू को लेकर चूजे मंगाना बंद कर दिया। बर्ड फ्लू की दहशत का असर कारोबार पर भी पड़ रहा है। बिक्री कम होती जा रही है।
-अज्जू, मुर्गी पालक
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बर्ड फ्लू हो या फिर कोई अन्य कारण। इधर कुछ दिनों से चिकन की बिक्री प्रभावित होने से करीब 20 से 25 प्रतिशत तक कारोबार प्रभावित हुआ है।
-मोहम्मद अकील चिकन विक्रेता
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बर्ड फ्लू की आशंका के बीच वन कर्मियों ने की गश्त
बांकेगंज । बर्ड फ्लू की आशंका के चलते दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के वन कर्मियों ने वन क्षेत्र की सभी रेंजों के जलाशयों पर गश्त कर जायजा लिया। इस दौरान टीमों को किसी भी वेटलैंड पर असामान्य स्थिति नहीं दिखाई दी।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक डॉ अनिल कुमार पटेल के निर्देश पर शुक्रवार को वन विभाग की टीमों ने मैलानी, भीरा रेंज की नगरिया झील, झादीताल समेत अन्य रेंजों में स्थिति सुहेली बैराज, शारदा नदी के किनारे भ्रमण कर हालात का जायजा लिया। डिप्टी रेंजर बालकृष्ण पाल, फॉरेस्टर मोहम्मद उमर,राजेंद्र वर्मा, सत्यप्रकाश वर्मा आदि ने जलाशयों का बारीकी से निरीक्षण करने के साथ ही प्रवासी और स्थानीय पक्षियों की गतिविधियों का सामान्य अध्ययन किया। यह पेट्रोलिंग सुबह से शाम तक जारी रही।
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बर्ड फ्लू के मद्देनजर वन कर्मियों की टीमों से विभिन्न वेटलैंड का निरीक्षण कराया गया, फिलहाल कोई असामान्य स्थिति नहीं पाई गई है।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।
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