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Lakhimpur Kheri News: सीएचसी में दो साल से धूल फांक रही बायोकेमिस्ट्री मशीन

Fri, 24 Jul 2026 10:50 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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निघासन सीएचसी की पैथोलाॅजी में धूल फांकती मशीन। संवाद
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निघासन। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में करीब दो वर्ष पहले स्थापित की गई बायोकेमिस्ट्री मशीन अब तक नियमित रूप से संचालित नहीं हो सकी है। मशीन निर्माता कंपनी के इंजीनियरों की तीन बार तकनीकी जांच के बाद भी समस्या दूर नहीं हो पाई। सीएचसी प्रशासन का कहना है कि हाई वोल्टेज और अर्थिंग की समस्या के कारण मशीन नहीं चल पा रही है। इसके समाधान के लिए स्टेबलाइजर और यूपीएस उपलब्ध कराने का प्रस्ताव जिला मुख्यालय को भेजा गया है।
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सीएचसी में सीबीसी (कम्पलीट ब्लड काउंट) मशीन भी 10 जून से बंद पड़ी है। अधिकारियों के अनुसार हाई वोल्टेज के साथ ही डाइल्यूएंट केमिकल उपलब्ध न होने से यह मशीन संचालित नहीं हो पा रही है। इससे मरीजों को सीबीसी समेत कई जरूरी जांचों की सुविधा नहीं मिल रही।

सीएचसी में प्रतिदिन लगभग 35 से 40 मरीज पैथोलॉजी जांच के लिए पहुंचते हैं। इनमें औसतन 10 मरीज ऐसे होते हैं, जिन्हें सीबीसी या बायोकेमिस्ट्री जांच की आवश्यकता होती है। जांच सुविधा उपलब्ध न होने पर इन मरीजों को जिला अस्पताल रेफर किया जाता है। यदि तत्काल जांच जरूरी हो तो मरीजों को निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है, जहां एक मरीज पर लगभग 500 से 600 रुपये तक का अतिरिक्त खर्च आता है।
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बायोकेमिस्ट्री मशीन से लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी), सीरम यूरिया, सीरम क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड, बिलीरुबिन, एसजीओटी (एएसटी), एसजीपीटी (एएलटी), अल्कलाइन फॉस्फेटेज, टोटल प्रोटीन और एल्ब्यूमिन सहित कई महत्वपूर्ण जांचें की जाती हैं। मशीन बंद रहने से इन सभी जांचों का लाभ मरीजों को नहीं मिल पा रहा है।

लैब तकनीशियन संदीप कुमार ने बताया कि मशीन में आई तकनीकी खराबी की सूचना कई बार लिखित रूप से जिला मुख्यालय को भेजी जा चुकी है। कंपनी के इंजीनियर भी तीन बार निरीक्षण कर चुके हैं। जांच में हाई वोल्टेज और अर्थिंग की समस्या सामने आई है। उन्होंने बताया कि स्टेबलाइजर और यूपीएस की मांग का प्रस्ताव सात जुलाई को जिला मुख्यालय को भेजा गया है। इसकी अनुमानित लागत की जानकारी उनके पास नहीं है और मामला जिला स्तर पर लंबित है।

इन जांचों की सुविधा नहीं मिल रही
सीबीसी (कम्पलीट ब्लड काउंट), लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी), किडनी फंक्शन टेस्ट (केएफटी), सीरम यूरिया, सीरम क्रिएटिनिन, यूरिक एसिड, बिलीरुबिन, एसजीओटी (एएसटी), एसजीपीटी (एएलटी), अल्कलाइन फॉस्फेटेज, टोटल प्रोटीन एल्ब्यूमिन की जांचों की सुविधा नहीं मिल पा रही है।

वर्तमान में हीमोग्लोबिन, ब्लड शुगर, पेशाब, बलगम, टीबी की सीबीएनएएटी (सीबी-नैट) और ट्रूनाट जांच के साथ चेस्ट एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध है। लैब के लिए अलग क्षमता के यूपीएस और स्टेबलाइजर की आवश्यकता है। वर्तमान में उपलब्ध जनरेटर और इनवर्टर से मशीनों का सुरक्षित संचालन संभव नहीं है।
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डॉ. कुलदीप सिंह, अधीक्षक, सीएचसी निघासन
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