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बहुग्राम पेयजल योजना में जुड़ेंगी कई ग्राम पंचायतें

Sat, 13 Jun 2015 06:18 PM IST
लखीमपुर खीरी
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ग्रामीण पाइप पेयजल योजना में अधिक से अधिक लोगों को लाभान्वित करने के लिए बहुग्राम योजना शुरू की गई है। इसमें ऐसी पेयजल नीति बनी है, जिसमें एक ही पाइप से कई ग्राम पंचायतों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराई जा सके। योजना में आखिरी ग्रामीण तक पेयजल उपलब्ध कराना अनिवार्य है।
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जल निगम के अभियंताओं और निर्माण एजेंसियों को और अधिक जवाबदेह बनाने के लिए शासन स्तर पर ग्रामीण पाइप पेयजल योजना की नीति में भारी बदलाव किया गया है। अभी तक प्राय: यह देखने में आता है कि मानकों के विपरीत ओवरहेड टैंक और पाइप लाइन का काम पूरा करने के बाद निर्माण एजेंसियां ग्राम पंचायतों को पाइप लाइन हैंडओवर कर देते थे, लेकिन पेयजल नीति में बदलाव के बाद अब पांच साल तक संचालन और अनुरक्षण का कार्य निर्माण एजेंसियों को ही करना है। प्रमुख सचिव अरुण सिंघल ने नए सर्कुलर में बताया है कि पेयजल योजनाओं के लिए एकल ग्राम योजना और बहुग्राम योजना शुरू कर की गई है। एकल ग्राम पेयजल योजना के लिए उस ग्राम पंचायत की पेयजल एवं स्वच्छता समिति ही संचालन समिति का कार्य करेगी। जबकि बहुग्राम योजना के अंतर्गत संबंधित पंचायतों की पेयजल एवं स्वच्छता समिति के अध्यक्ष तथा प्रत्येक ग्राम पंचायत की समिति द्वारा नामित दो-दो सदस्यों को मिलाकर संयुक्त संचालन समिति का गठन किया जाएगा। समिति के अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष का चुनाव इसी समिति के सदस्यों में से किया जाएगा। यह जरूरी है कि दोनों अलग-अलग पंचायतों के रहने वाले होंगे।
पेयजल योजनाओं का तैयार होगा डेटाबेस
जिला पेयजल एवं स्वच्छता समिति द्वारा सभी ग्रामीण पाइप पेयजल योजनाओं का डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इसमें योजना का स्थान, संबंधित जनसंख्या, व्यक्तिगत कनेक्शनों की संख्या, स्टैंड पोस्ट, प्राप्त राजस्व की स्थिति, पानी की गुणवत्ता तथा नलकूप की क्षमता से संबंधित सूचनाएं उपलब्ध रहेंगी।
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अनुरक्षण एवं संचालन निधि बनेगी
बहुग्राम पेयजल योजना के संचालन और अनुरक्षण के लिए अलग से निधि होगी। इसमें योजना से लाभान्वित ग्रामीणों से वसूली गई धनराशि (यूजर चार्जेज) इसी निधि में जमा की जाएगी। जिससे ग्रामीण का स्वच्छ पेयजल के लिए दिया गया शुल्क योजना के रखरखाव पर ही खर्च किया जा सके।
डीपीआरओ योगेंद्र कटियार ने बताया कि ग्रामीण पाइप पेयजल योजना में कई बदलाव किए गए हैं और इसमें ग्राम पंचायतों की पेयजल एवं स्वच्छता समिति को ताकतवर बनाया गया है और कई अधिकार प्रदान किए गए हैं। उनकी संस्तुति पर योजनाओं के संचालन और अनुरक्षण का कार्य दूसरी निर्माण एजेंसियों को सौंपा जा सकता है।
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