गोला गोकर्णनाथ। सावन के अंतिम सोमवार और भूतनाथ मेले पर नगर में लाखों श्रद्धालुओं का जनसमूह उमड़ने की उम्मीद है। इसके लिए प्रशासन ने बृहस्पतिवार रात से ही शिव मंदिर के मुख्य मार्ग में पड़ने वाले शिवम चौराहे के चारों मार्गों की बैरिकेडिंग को लोहे के बैरियर के रूप में तब्दील कर दिया।
शिव मंदिर परिक्षेत्र के सभी मार्गों पर दो पहिया वाहन चालकों के भी प्रवेश पर रोक लगा दी है। प्रशासन की किले जैसी सुरक्षा व्यवस्था में परिक्षेत्र के रहने वाले लोगों की दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। प्राचीन परंपरा के अनुसार, नाग पंचमी के बाद सोमवार को भूतनाथ शिवालय पर एक दिवसीय मेला लगता है। इस बार ये मेला चार अगस्त को लगना है। यहां उमड़ने वाली भीड़ का नियंत्रण प्रशासन के लिए परीक्षा की तरह होता है। शुक्रवार को डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल, एडीएम नरेंद्र बहादुर सिंह, एसपी संकल्प शर्मा, एएसपी प्रकाश कुमार ने विधायक अमन गिरि और नगर पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला रिंकू के साथ शिव मंदिर और भूतनाथ मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। स्थानीय प्रशासन द्वारा तैयार किए गए रूट प्लान को देखा।
शिव और भूतनाथ मंदिर के लिए आवाजाही के मार्ग किए अलग
अधिकारियों ने बताया कि शिव मंदिर और भूतनाथ मंदिर आने-जाने के रास्ते अलग-अलग रहेंगे। शिव मंदिर का मार्ग पूर्व निर्धारित ही रहेगा। यहां दर्शन करने के बाद श्रद्धालु मेला मैदान, सीओ ऑफिस के पीछे से होते हुए मिल मार्ग, अशोक चौराहा, लखीमपुर मार्ग और नानक पुलिस चौकी के पास से सिनेमा मार्ग होते हुए त्रिलोक गिरि मंदिर मार्ग से भूतनाथ मंदिर जाएंगे, जिनका निकास होंडा एजेंसी के पास से लखीमपुर मार्ग पर होगा। हालांकि, रास्ते पर श्रद्धालुओं का तीन से चार किलोमीटर का फेर बढ़ जाएगा।
सोशल मीडिया के माध्यम से निकला गुस्सा
शिव मंदिर के मुख्य मार्ग में शिवम चौराहे से मंदिर के मुख्य द्वार के बीच दोनों और बैरिकेडिंग को लोहे के फाटक में तब्दील कर बंद कर दिया गया है। सुबह का आलम यह रहा कि बच्चों को लेने के लिए स्कूली वाहन घरों तक नहीं जा सके। रेलवे स्टेशन, रोडवेज परिक्षेत्र में रहने वाले लोगों को गली-कूचों से होकर जाना पड़ा। ऐसे में स्कूली बच्चे और उनके अभिभावकों की परेशानी बढ़ी। मंदिर परिक्षेत्र निवासी विक्रांत गिरि सहित कई लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों की दिक्कतें बताकर अपना गुस्सा बयां किया।
पौराणिक शिव मंदिर मुख्य मार्ग में बैरिकेडिंग पर लगाए जा रहे फाटक। संवाद