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बेसिक शिक्षा बदहाल, ककहरा भी नहीं सीख पा रहे बच्चे 

Wed, 19 Apr 2017 11:21 PM IST
लखीमपुरखीरी
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तमाम कोशिशों के बावजूद सरकारी शिक्षा की गुणवत्ता में कोई सुधार नहीं हो रहा है। जिले में 2723 प्राथमिक, 1140 उच्च प्राथमिक, 16 कस्तूरबा और 14 समाज कल्याण के विद्यालय हैं, जिनमें दस हजार 991 शिक्षक नियुक्त हैं। महज 1553 सहायक अध्यापक पदों पर चयन की कार्यवाही गतिमान हैैैै। वर्तमान में सहायक अध्यापक अध्यापक पदों की संख्या रिक्त नहीं है, बल्कि इसके पूर्ण होते ही 1159 सहायक अध्यापक अतिरिक्त कार्यरत होंगे। इसके अलावा अनुदेशक भी पढ़ा रहे हैं। इसके बाद भी स्कूलों में बच्चे पढ़ने तक नहीं जा रहे हैं। विकास खंड बांकेगंज में अमर उजाला टीम ने सरकारी शिक्षा का हाल जानने की कोशिश की तो पाया कि बेसिक स्कूलों में बच्चों को ककहरा तक नहीं आता है। प्रस्तुत है प्राथमिक स्कूलों में सुबह से लेकर छुट्टी तक आंखों देखा हाल:


आठवीं में पढ़ते, नहीं जानते घड़ी देखना 
बांकेगंज। सरकारी स़्कूलों की पड़ताल में न शिक्षा की गुणवत्ता और न ही गुणवत्ता सुधारने की ललक दिखी। शिक्षा का आलम यह है कि कक्षा एक और दो के बच्चों की बात तो जाने दीजिए, छह से आठवीं तक के बच्चों को न तो पहाड़ा ही याद है और न ही वे घड़ी में टाइम देखना जानते हैं। स्कूलों में नामांकन के सापेक्ष उपस्थित बहुत कम रहती है। एमडीएम, नि:शुल्क यूनीफार्म, छात्रवृत्ति, किताबें, बर्तन आदि में माल काटने के लिए शिक्षकों  ने यह गोलमाल बना रखा है। बच्चों को स्कूल भेजने के लिए चलाए जाने वाले अभियान फ्लाप साबित हो रहे है।      
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प्राथमिक विद्यालय: 2723
उच्च प्राथ. विद्यालय: 1140
कस्तूरबा विद्यालय:  16
समाज कल्याण स्कूल: 14
कुल शिक्षक: 10, 991

सीन-1 
बुधवार समय प्रात: 07.30 बजे      
बांकेगंज ब्लाक का प्राथमिक विद्यालय एबीपुर
शिक्षकों की संख्या: चार, उपस्थित: दो      
08.00 बजे: दो रसोइया स्कूल पहुंची      
08.12 बजे: सहायक अध्यापिका स्कूल पहुंची      
प्रधानाध्यपक: आकस्मिक अवकाश पर
पंजीकृत बच्चे: 78      
उपस्थित: 15 बच्चे        

ग्राम पंचायत ग्रंट नंबर 11 के प्राथमिक विद्यालय एबीपुर  में तैनात दो शिक्षक अपनी ड्यूटी पर मुस्तैद मिले, लेकिन साफ-सफाई के अभाव में स्कूल में गंदगी के ढ़ेर लगे थे। स्कूल प्रांगण में जर्जर शौचालय होने के कारण बच्चों और शिक्षिकाओं को परेशानियां उठानी पड़ती है। न बच्चों के बैठने के लिए टाट-पट्टियां बिछी थी। आठ बजे जब रसोइया पहुंची तो स्कूल और किचन की सफाई शुरू की। तब तक एक भी बच्चा स्कूल नहीं पहुंचा था। 08.12 बजे सहायक अध्यापिका स्कूल पहुंची, बच्चे तब  भी नहीं थे। 09.00 बजे बच्चों का आना शुरू हुआ और दस बजे तक सिर्फ 15 बच्चे ही स्कूल पहुंचे। कुछ देर पढ़ाई के बाद बच्चों को तहरी खिलाई गई और दूध पिलाया गया। अपराह्न एक बजे स्कूल में छुट्टी कर दी गई। प्रधानाध्यापक आकस्मिक अवकाश के चलते स्कूल नहीं आए।       
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सीन 2      
समय:  पूर्वाह्न 10.45      
उच्च प्राथमिक विद्यालय बाबूपुर      
कुल शिक्षक- तीन      
उपस्थित... शत प्रतिशत      
पंजीकृत छात्र... 65      
उपस्थित बच्चे... 12      

सीन 3....      
समय: 10.55 पूर्वाह्न       
प्राथमिक विद्यालय: सरकारपुर      
कुल शिक्षक- छह      
उपस्थित... पांच      
एक शिक्षिका- सीसीएल अवकाश      
पंजीकृत छात्र... 115      
उपस्थित.... 20      

   
सीन 4.....       
समय:  पूर्वाह्न 11.05 बजे      
उच्च प्राथमिक विद्यालय: प्रतापपुर      
कुल शिक्षक- 5      
उपस्थित- शत-प्रतिशत      
पंजीकृत बच्चे: 138      
उपस्थित: 67      

     
सीन 5.....      
प्राथमिक विद्यालय: प्रतापपुर      
समय पूर्वान्ह 11.15 बजे      
कुल शिक्षक: 4      
उपस्थित: शत प्रतिशत      
पंजीकृत बच्चे: 99      
उपस्थित: 63 

प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नियमित खुद उनके द्वारा निरीक्षण किए जाते हैं। लापरवाही पर शिक्षकों पर कार्रवाई भी हो रही है। शिक्षा में व्यापक सुधार आया है, लेकिन अभिभावकों में अभी भी जागरूकता की कमी है तो कुछ शिक्षक भी रुचि नहीं ले रहे हैं। यहीं वजह है शिक्षा का स्तर आशा के अनुकूल उठ नहीं सका हैै। लगातार सुधार के प्रयास जारी है। आने वाले समय में व्यापक सुधार भी होंगे।
-संजय शुक्ल, बीएसए


 
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