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बाढ़ से अपना अस्तित्व बचाने की जंग लड़ रहा बाछेपारा गांव

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बाढ़ खंड गांव को बचाने में नाकाम साबित हो रहा है।
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बाछेपारा के अब तक 120 घर नदी में समाए, करीब 30 और घर निशाने पर
धौरहरा। तहसील क्षेत्र के रमियाबेहड़ के गांव बाछेपारा और गोडियन पुरवा तो ईसानगर के कैरातीपुरवा गांव के लोग बाढ़ से अपना अस्तित्व बचाने की जद्दोजहद कर रहे हैं। यह गांव कभी भी पूरी तरह घाघरा नदी में समा सकते हैं। फिलहाल नदी ने आबादी क्षेत्र में कटान धीमा किया है, वहीं जमीन का नदी लगातार कटान कर रही है। नदी की तबाही देख ग्रामीणों में दहशत है।
बाछेपारा गांव में अब तक करीब 120 घर घाघरा नदी में समा चुके हैं, वहीं करीब 30 घर कटान की जद में हैं। बाढ़ खंड गांव को बचाने में नाकाम साबित हो रहा है। वहीं कैरातीपुरवा गांव को घाघरा ने अपने निशाने पर ले लिया है। सात घर कटान की जद में हैं। कटान के डर से ग्रामीण खुद ही घरों को तोड़कर सुरक्षित स्थान पर जा रहे हैं। इसके अलावा शारदा नदी भी रैनी, समदहा, जमदरी, खनवापुर में कटान कर रही है और ग्रामीणों की फसल लगी जमीनें नदी में समा रही हैं।
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तहसील प्रशासन से कटान पीड़ितों को स्कूल खाली करने को कहा
धौरहरा। बाछेपारा गांव के कटान पीड़ितों का दर्द कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बुधवार को कटान पीड़ितों को राहत सामग्री बांटने पहुंचे तहसील प्रशासन ने सरकारी स्कूलों में रह रहे कटान पीड़ितों को स्कूल खाली करने का फरमान सुना दिया।
कटान पीड़ित स्कूलों में और सड़कों के किनारे खुले आसमान तले अपना गुजारा कर रहे हैं। तहसील प्रशासन कटान पीड़ितों के रहने के लिए अभी तक कोई ठिकाना नहीं ढूंढ सका है। बुधवार को एसडीएम रेनू सहित तहसीलदार संतोष कुमार शुक्ला ने बाछेपारा गांव पहुंचकर कटान पीड़ितों को राहत किट वितरित की थी। इस दौरान अधिकारियों ने कटान पीड़ितों से कहा कि स्कूल खुल गए हैं, वह स्कूल खाली कर दें। जब कटान पीड़ितों ने जमीन उपलब्ध कराने को कहा तो तहसीलदार ने हाथ खड़े कर दिए। संवाद
चौगुर्जी गांव में मोहाना और कर्णाली नदी का कटान जारी
तिकुनिया। भारत नेपाल सीमा पर स्थित चौगुर्जी गांव में मोहाना और कर्णाली नदी का कटान लगातार जारी है। बाढ़ खंड के अधिकारी कोई सुनवाई नहीं कर रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि यहां बीते 15 दिनों से नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा और नदी कटान करते-करते गांव तक पहुंच गई। ग्रामीणों ने इस बाबत सिंचाई विभाग के अधिकारियों को सूचना दी। सूचना के बावजूद कटान रोकने का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया। गांव निवासी शिवचरण, नंदकिशोर गोविंद सहित कई लोगों ने बताया कि उनकी जमीन नदी में कट गई है। अब उनके सामने गुजारे की समस्या पैदा हो गई है।
यहां बता दें कि चौगुर्जी गांव मोहाना नदी के पार है। नदी की चौड़ाई लगभग एक किलोमीटर है, जिसके चलते ग्रामीणों को गांव से तिकुनिया कस्बा आना-जाना मुश्किल हो रहा है। मोहाना नदी के पार सूरत नगर गांव के 40 लोग झोंपड़ी डालकर रह रहे हैं।
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लगातार बारिश से उफनाईं मोहाना और कर्णाली नदियां
भारत-नेपाल सीमा पर बह रही मोहाना, कर्णाली और कौड़ियाला नदियां बीते तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश के चलते उफान पर आ गई हैं। इसके चलते ग्रामीणों में बाढ़ की आशंका से दहशत पैदा हो गई है। ग्रामीणों ने इस बाबत सूचना प्रशासन को दी है। इसके चलते निकटवर्ती गांव गंगानगर रामनगर जनकपुर सूरतनगर, इंद्रनगर टाडा के ग्रामीणों में खौफ पैदा हो गया है।
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