तिकुनिया हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्र अपनी रिहाई के बाद 62 दिन ही खुली हवा में सांस ले सका था कि अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा आशीष की जमानत निरस्त किए जाने के फैसले से बाजी फिर से पलट गई है, जिससे उसे फिर से जेल जाना होगा। जमानत रद्द करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक सप्ताह के अंदर आशीष को सरेंडर करने के लिए कहा है।
तीन अक्तूबर 2021 को तिकुनिया में हुई हिंसा में आठ लोगों की मौत हुई थी, जिसमें केंद्रीय गृह राज्यमंत्री के पुत्र आशीष मिश्रा को मुख्य आरोपी बनाया गया था। इसके बाद नौ अक्तूबर 2021 को मामले की जांच कर रही एसआईटी ने पूछताछ के बाद मध्य रात्रि में आशीष मिश्रा की गिरफ्तारी की थी। आशीष समेत कुल 13 आरोपियों को जेल भेजा गया था, जिसमें से हाईकोर्ट लखनऊ पीठ ने 10 फरवरी 2022 को आशीष मिश्रा की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए सशर्त जमानत मंजूर की थी। अदालत व जेल की औपचारिकताएं पूरी करने के बाद 15 फरवरी 2022 को आशीष मिश्रा जेल से बाहर आया था।
इस दौरान करीब 128 दिन आशीष को जेल में बिताने पड़े थे, जबकि उसके अन्य साथियों की जमानत मंजूर नहीं हो पाई। विधानसभा चुनाव तक यह प्रकरण ठंडे बस्ते में रहा, लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद तिकुनिया हिंसा मामले में एक गवाह पर निघासन क्षेत्र में हमला हुआ था। इससे तिकुनिया हिंसा प्रकरण फिर से तूल पकड़ने लगा, जिसके बाद दूसरे पक्ष के लोगों ने आशीष मिश्रा की जमानत को निरस्त कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में गुहार लगाई।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चलने के दौरान ही रामपुर में एक गवाह पर हमला होने की बात सामने आई थी। शायद यही वजह रही कि सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की जमानत को निरस्त करते हुए सात दिन के अंदर कोर्ट के सामने सरेंडर करने का फैसला सुना दिया है। इससे केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी समेत उनके समर्थकों में मायूसी छा गई है।
किसान नेता बोले, देर है मगर अंधेर नहीं
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया हिंसा मामले में आरोपी आशीष मिश्र की जमानत रद्द होने पर भारतीय किसान यूनियन चढूनी के उत्तर प्रदेश महासचिव अमनदीप संधू ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बिल्कुल ठीक है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि हाईकोर्ट ने पीड़ित पक्ष को नहीं सुना। उन्हें जल्दबाजी में जमानत दी गई।
भारतीय किसान यूनियन चढूनी सरकार से भी अपील करती है कि वह भी पीड़ित पक्ष के साथ खड़ी हो । किसान गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के इस्तीफे की मांग पर अड़े हैं। उन्होंने कहा कि मंत्री के केंद्र में होने की वजह से सरकार भी उनके दबाव में है। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से किसानों को काफी राहत मिली है। कहा कि न्याय मिलने में देर है, मगर अंधेर नहीं है। संवाद