पूर्व विधायक अरविंद गिरि ने तीन जुलाई को राजनीति से सन्यास लेने की घोषणा की थी। घोषणा के अनुरूप ही रविवार को कार्यकर्ताओं को राजनीतिक जीवन में संघर्ष के दौरान किए गए सहयोग का धन्यवाद ज्ञापित करने के लिए बुलाई गई धन्यवाद सभा में कार्यकर्ताओं के उत्साह को देखते हुए उन्होंने सन्यास के फैसला वापस ले लिया। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि कार्यकर्ताओं के सम्मान के लिए सदैव संघर्ष किया है और करेंगे।
पूर्व नियोजित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को सुबह से ही लखीमपुर रोड स्थित पब्लिक इंटर कॉलेज प्रांगण में उनके समर्थकों की भीड़ तख्ती, बैनर के साथ उमड़ पड़ी। लोग सन्यास नहीं संघर्ष चाहिए की तख्तियां-बैनर लेकर आए थे। समर्थकों ने कहा कि पूर्व विधायक का राजनीति से सन्यास कर निर्णय जनता के साथ धोखा है। समर्थकों ने अपने संबोधन में सन्यास वापस न लेने पर आमरण अनशन और आत्मदाह की भी धमकी दे डाली। मंच पर समर्थकों ने पूर्व विधायक अरविंद गिरि के संघर्षों, जनता के हित में किये गए कार्यों, आंदोलनों का बखान किया। पूर्व विधायक के 20-22 वर्षों में हर कदम पर साथ देने वाले समर्थकों, शुभचिंतकों ने मंच से सन्यास के निर्णय का विरोध करते हुए राजनीति में पुन: आने का आह्वान किया। गिरि जब मंच के पास पहुंचे तो समर्थकों ने नारेबाजी करते हुए उनका जोरदार स्वागत किया, किंतु राजनीति में वापसी की घोषणा करने तक मंच पर नहीं चढ़ने दिया और नीचे की कुर्सी पर बैठा दिया। अंत में मंच से पूर्व विधायक अरविंद गिरि ने अपने वर्षों पुराने समर्थकों का अपने साथ किए गए संघर्ष के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने अपने भूलपूर्ण निर्णय पर समर्थकों के साथ रहने की सराहना की। उन्होंने चाहें बाढ़मुक्त, रेल रोको आंदोलन रहा हो या किसानों के हक की लड़ाई रही हो, कभी पक्षपात की भावना से संघर्ष नहीं किया। उन्होंने अपने सन्यास लेने की घोषणा पर कहा कि आज परिस्थितयों बस ऐसा किया था, लेकिन झंडा हो न हो आप सभी समर्थक हमारे लिए हर लड़ाई में डंडे के समान हो, इसे मैं मजबूत रखना चाहता हूं। समर्थकों के आग्रह पर राजनीति में पुन: वापसी की घोषणा करते हुए कहा कि राजनीति के शुरुआती सफर में उनके साथ 22 न्याय पंचायतों, गांवों स्तर पर विश्वासपात्र समर्थकों की टोलियां हुआ करती थीं जो संगठनात्मक कार्य करती थीं, उनके साथ विचार विमर्श के साथ वह पुन: आपके आशीर्वाद से राजनीति में सक्रिय होकर सम्मान के लिए संघर्ष करेंगे।
कार्यकर्ताओं ने सन्यास वापस न लेने के लिए भरा जोश
मौलाना यूसुफ अली ने सन्यास वापस न लेने पर उनके फार्म हाउस के सामने समर्थकों के साथ आमरण अनशन और आत्मदाह तक करने, ज्ञान सिंह ने जिंदादिली इंसान कभी भी हार नहीं मानता कहते हुए, मितौली के प्रदीप शुक्ला, आजाद अली, जिला पंचायत सदस्य गुरमीत सिंह ने, कैसर आलमी, और मधुकर शैदाई ने अपनी कविता के अरविंद के सन्यास के निर्णय को गलत बताते हुए फैसाला वापस लेने के लिए जोश भरा। राजनीति के सफर में साथ रहने वाले रामकुमार गौतम ने ढपली पर गीत और आल्हा के माध्यम से अपनी बात रखी। साथ ही स्वरूप सिंह, मोईन खां, रमेश पांडे, हादी हसन खां, आमिर अली आदि ने भी संबोधित किया। संचालन विश्वनाथ सिंह ने किया।
इन प्रमुख लोगों की रही मौजूदगी
सभा में जिला पंचायत सदस्य हरिशंकर सिंह, डॉ बच्चू सिंह, तरसेम सिंह, हादीहसन खां, आशीष सिंह, लक्ष्मीकांत अवस्थी, प्रेम वाजपेयी, डॉ. हरमोहन सिंह खुराना, विनय सिंह चौहान, केके शुक्ला, जनार्दन गिरि, अमृतपाल सिंह, राजेश शुक्ल, अचल श्रीवास्तव, द्वारिका प्रसाद रस्तोगी, हरिकिशोर, टीटू भसीन, रामकुमार गिरि, बैजनाथ अग्निहोत्री, रमेश पांडे, रामकुमार शुक्ला आदि मौजूद रहे।
समर्थकों की नब्ज टटोलने को की धन्यवाद सभा
पूर्व विधायक अरविंद गिरि ने धन्यवाद सभा में अपने समर्थकों की नब्ज टटोलने का काम किया। समर्थकों के उत्साह, स्नेह, समर्पण को देख अरविंद गिरि ने 22 न्याय पंचायतों में बैठक करने की घोषणा की है।
पब्लिक कालेज में रहुई धन्यवाद सभा में समर्थकों की भीड़ से गदगद अरविंद गिरि ने इस शर्त पर सक्रिय राजनीति में भागीदारी करने का ऐलान किया कि वे 22 न्याय पंचायतों में बैठकें कर समर्थकों से मन की बात करेंगे। उन्होंने धन्यवाद सभा में समर्थकों का मन जीतने के लिए भावुक होकर उनका धन्यवाद दिया। हालांकि अरविंद गिरि ने अपने राजनीतिक जीवन में बिताए समय का भी स्मरण दिलाया, जिनमें मुलायम सिंह यादव, जितिन प्रसाद और बसपा के शीर्ष पदाधिकारियों का उनके हित में किए गए कार्यों का बखान किया।