बैंक ने भुगतान से किया इनकार तो खुल गई पोल
शाखा प्रबंधक बोले नियम विरुद्ध थी प्रक्रिया, इसलिए नहीं हुआ भुगतान
पिता और बेटा दो अलग-अलग समितियों में सचिव, बेटे को नौकरी देने पर हुआ खुलासा
धौरहरा। तहसील क्षेत्र की साधन सहकारी समिति हसनापुर के सचिव पर सरकारी नियमों के खिलाफ फर्जी तरीके से ही अपने पुत्र को नौकरी दे दी और बाकायदा उसके वेतन के भुगतान के लिये सहकारी बैंक को चेक भेज दिया। मामले का खुलासा तब हुआ जब शाखा प्रबंधक ने भुगतान से मना कर दिया। बताया गया कि भुगतान के लिये शाखा प्रबंधक पर दबाव भी बनाया गया। उधर, विभागीय अधिकारी अब मामले की लीपापोती में जुटे हैं।
तहसील क्षेत्र के हसनापुर साधन सहकारी समिति के सचिव श्याम बिहारी त्रिवेदी ने शासन के नियमों को दरकिनार कर अपने ही पुत्र अरुण कुमार त्रिवेदी को बिना भर्ती प्रक्रिया अपनाए समिति में सहायक अकाउंटेंट की नौकरी दे दी। बताया गया कि अपने ही लोगों के बोर्ड में प्रस्ताव पास कर पुत्र को नौकरी दी और बाकायदा उसका वेतन बनाकर रसूलपुर स्थित जिला सहकारी बैंक भेज दिया, जबकि यह प्रक्रिया पहले ही खत्म हो चुकी थी।
मामले का खुलासा तब हुआ जब शाखा प्रबंधक श्रीराम भार्गव ने मामले को संदिग्ध जान सचिव पुत्र को वेतन देने से मना कर दिया। बताया गया कि इस पर फर्जी नौकरी और अवैध तरीके से वेतन हथियाने में लगे सचिव श्यामबिहारी ने शाखा प्रबंधक पर नाराजगी जताते हुए वेतन निर्गत करने का दबाव बनाया, जिस पर शाखा प्रबंधक ने मामले की रिपोर्ट अपने विभागीय अधिकारियों को भेज दी और निर्देश मिलने पर वेतन रोक दिया। उधर, मीडिया में मामला सामने आने के बाद अब विभागीय अधिकारी मामले की लीपापोती में जुटे हैं। हालांकि, मामले को संज्ञान में लेकर सहायक आयुक्त एवं निबंधक, सहकारिता विभाग ने एडीसीओ शंकर लाल से मामले को दिखवाकर रिपोर्ट तलब की है, जबकि सचिव श्याम बिहारी का कहना है कि वह अपनी मदद के लिये अपने बेटे को कार्यालय में बैठाते हैं।
समिति के बोर्ड की तरफ से प्रस्ताव कराकर सचिव ने अपने पुत्र को नौकरी दी थी। बैंक को वेतन के भुगतान के लिए कहा गया था, लेकिन शासन के नियमों के विपरीत होने पर मैंने भुगतान से इनकार कर दिया और आगे के निर्देश के लिये बैंक के अधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी। वेतन न देने का आदेश मिलने पर सचिव के बेटे का वेतन रोका गया।
- श्रीराम भार्गव, शाखा प्रबंधक, जिला सहकारी बैंक, रसूलपुर
मामला संज्ञान में आया है, देखते हैं इसमें क्या है। सचिव श्याम बिहारी का दूसरा बेटा भी एक समिति में सचिव है। यदि ऐसा हुआ है तो यह गलत है क्योंकि, कमेटी ऑफ मैनेजमेंट 2020 के पहले चयन करने की पॉवर थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है। 2020 के बाद भर्ती करवाकर नौकरी देने का प्रावधान है। एडीसीओ को मामले को देखने के लिये कहा गया है। रिपोर्ट के आधार पर जांच की जाएगी।
- सूर्य नारायण मिश्रा, सहायक आयुक्त एवं निबंधक, सहकारिता विभाग