लखीमपुर खीरी। स्ट्रॉबेरी, मिंट, चॉकलेट समेत अलग-अलग फ्लेवर वाला हुक्का युवाओं को आकर्षित कर रहा है। शादी समारोह और पार्टियों में युवा हुक्के के धुएं से तरह-तरह के आकार बनाकर रील भी बना रहे हैं।
हालांकि, फ्लेवर और खुशबू हुक्के के धुएं को सुरक्षित नहीं बनाते। धुएं के संपर्क में आने से श्वसन तंत्र प्रभावित हो सकता है और फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
हर साल 25 सितंबर को विश्व फेफड़ा दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर चिकित्सक धुएं के संपर्क से बचने की सलाह देते हैं। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ. रोहित पाठक के अनुसार, चूल्हे का धुआं हो या हुक्के का, दोनों फेफड़ों के लिए खतरनाक हो सकते हैं। धुआं सांस के साथ अंदर जाने पर उसके कण और गैसें फेफड़ों तक पहुंचती हैं। फ्लेवर डालने से हुक्का सुरक्षित नहीं हो जाता।
डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि स्वाद और खुशबू के कारण फ्लेवर वाला हुक्का युवाओं को ज्यादा आकर्षित करता है। इससे हुक्के का जोखिम खत्म नहीं होता। हुक्के का धुआं श्वसन तंत्र के संपर्क में आता है और लगातार सेवन से फेफड़ों को नुकसान पहुंच सकता है।
अगर लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, सीने में जकड़न या सांस फूलने जैसी समस्या हो तो चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
ये हो सकती हैं दिक्कतें
अस्थमा, पॉपकॉर्न लंग्स और फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्याएं
रक्तचाप बढ़ना और धमनियों का सिकुड़ना
रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होना
शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति धीमी होना
मस्तिष्क के विकास की गति प्रभावित होना
त्वचा संबंधी समस्याएं और दांत कमजोर व पीले होना