बसों का नियमित संचालन न होने से यात्री परेशान
मैलानी-ऐशबाग रूट पर ट्रेनें बंद होने से बढ़ीं दिक्कतें
लखीमपुर से शाम को तिकुनियां के लिए बस चलाने की मांग
सीतापुर डिपो की मनमानी से क्षेत्रीय लोगों के साथ नेपाल के यात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बसों के अक्सर न आने से लोग लंबे इंतजार के बाद प्राइवेट बसों से यात्रा करने पर मजबूर हो जाते हैं। बसों का नियमित संचालन न होने से लोगों में रोष है। क्षेत्रीय लोगों ने शाम सात बजे के करीब एक बस लखीमपुर से तिकुनियां तक चलाए जाने की मांग की है। ब्रॉडगेज के कारण मैलानी-ऐशबाग रूट पर ट्रेनों का संचालन बंद होने से लोगों को और अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
क्षेत्रीय जनता की मांग पर तीन साल पहले सीतापुर डिपो से तिकुनियां के लिए 12 रोडवेज बसें चलाईं गईं थीं। तिकुनियां रोडवेज बस स्टैंड से लखनऊ के लिए सुबह साढ़े छह बजे और सीतापुर के लिए साढ़े सात व साढ़े आठ और साढ़े नौ बजे यानि तीन बसें थीं। इससे तिकुनियां, बेलरायां, सिंगाही और निघासन के लोगों के साथ पड़ोसी नेपाल देश के लोगों को जिला मुख्यालय के साथ लखनऊ, दिल्ली, हरिद्वार और मथुरा आने-जाने में काफी सहूलियत होती थी। रोडवेज बसों से जिला मुख्यालय पहुंचने में दो घंटे का समय लगता था, जबकि प्राइवेट बसें तीन से चार घंटे लेती थीं। इसलिए लोगों को रोडवेज बसों से यात्रा करना काफी सुगम था। दो महीने पहले हरिद्वार जाने वाली बसों को छोड़कर सभी बसों का संचालन ठप कर दिया था। अमर उजाला ने जब इस खबर को 18 फरवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया तो सुबह साढ़े सात और साढ़े आठ बजे सीतापुर तक के लिए बसों का संचालन शुरू कर दिया गया, लेकिन इन दोनों बसों का नियमित संचालन न होना लोगों के लिए मुसीबत बना हुआ है। लोग बसों का घंटों तक इंताजर करने के बाद प्राइवेट बसों से यात्रा करने को मजबूर हैं। क्षेत्रीय ग्रामीणों ने बसों का नियमित संचालन कराने और लखीमपुर से शाम सात बजे के करीब तिकुनियां तक एक बस चालू कराने की मांग परिवहन आयुक्त को पत्र भेजकर की है।