मोहम्मदी (लखीमपुर खीरी)। अमर उजाला के नारी गरिमा के साझा संकल्प अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स अभियान के तहत महिला सुरक्षा एवं सशक्तीकरण पर मंगलवार को मोहम्मदी महाविद्यालय में एक गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि प्रभारी निरीक्षक संजय त्यागी एवं विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ उपनिरीक्षक अमर नाथ राय रहे। महिला सिपाहियों ने छात्राओं को आत्मसुरक्षा के गुर बताए।
गोष्ठी का शुभारंभ मां सरस्वती के पूजन से हुआ। छात्रा काजल, पूनम पांडे, शालिनी, सोनाली सक्सेना, अर्पिता ने सरस्वती वंदना पेश की। प्रभारी निरीक्षक संजय त्यागी ने कहा कि महिला कभी अशक्त नहीं रही। महिलाओं की सुरक्षा के लिए पुलिस हर समय तैयार है। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की समस्या होने पर 1090 या फिर हमारे मोबाइल नंबर 9454403788 पर सूचना दें। उन्होंने बेटियों से कहा कि डरे नहीं, सहे नहीं। पुलिस हर वक्त उनकी सुरक्षा को तैयार है।
विशिष्ट अतिथि एसएसआई अमरनाथ राय ने कविताओं के माध्यम से बेटियों को अपने पैरो पर चलने की सीख दी। महिला आरक्षी हिना सैनी, नेहा यादव, निधि सिंह ने छात्राओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए। महिला बालिका सुरक्षा जागरूकता अभियान की जानकारी दी। चमन कुमार सक्सेना, मीनाक्षी अग्निहोत्री, शेशांकी गुप्ता, नेहा ने कहा कि घर से कॉलेज और कॉलेज से घर आते जाते समय यदि उनके साथ कोई वारदात होती है तो उसे छिपाएं नहीं, बल्कि उसके बारे में घर एवं कॉलेज में जानकारी दें। संचालन शैलेंद्र द्विवेदी, परवेज खां ने किया। अध्यक्षता अध्यक्ष सचिन मेहरोत्रा ने की। प्रबंधक मजीउल्ला खां ने अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया। केएम शुक्ला, मोहम्मद वासिफ, अनीश खां, पुष्पेंद्र मिश्रा, विंदुशेखर अग्निहोत्री, पप्पी सिंह सहित सभी प्राध्यापकों का सहयोग रहा। चीफ प्रॉक्टर डॉ. राम मोहन मिश्रा ने छात्राओं को शपथ दिलाई।
बोली बेटियां -
बेटियों को पढ़ाएं
डीएलएड की छात्रा रेखा वाजपेई ने कहा कि शिक्षा महिला सशक्तीकरण का प्रमुख कारण है। एक पुरुष को शिक्षित करने से सिर्फ वही शिक्षित होता है। मगर, जब स्त्री शिक्षित होती है तो वह एक पीढ़ी को शिक्षित करती है। इसलिए बेटियों की शिक्षा जरूरी है।
कन्या भ्रूण हत्या पर हो कड़ी सजा
छात्रा ब्यूटी सिंह ने कहा कि समाज का दृष्टिकोण महिलाओं के प्रति दोयम दर्जे का है। घर में जब बेटा जन्म लेता है तो खुशियां मनाई जाती हैं। मगर, बेटी के जन्म पर घर में उदासी छा जाती है। कन्या भ्रूण हत्या आज भी जारी है, इसके लिए कठोर सजा का प्रावधान होना चाहिए।
जीवन से जुड़ा हर फैसला लेने में समर्थ हों महिलाएं
डीएलएड छात्रा शिवांगी त्रिवेदी ने कहा कि महिला सशक्तीकरण का अर्थ है कि महिलाएं शक्तिशाली बनें, जिससे वह जीवन से जुड़ा हर फैसले स्वयं ले सकें। मगर, देश की 40 प्रतिशत महिलाएं शिक्षित होने के बावजूद घर पर बैठी हैं, जिससे देश का आधा ज्ञान घर व्यर्थ हो रहा है।
बिन बेटी सूना है घर परिवार
डीएलएड की छात्रा लवी सिंह ने बिन बेटी सूना है घर परिवार, बेटी तो है लक्ष्मी अवतार
बेटी नहीं है किसी से कम, बेटी से ही मिलेगा देश को दम
शिक्षा बेटी का है हथियार, बढ़ाओ कदम करो विचार कविता सुनाकर बेटी के महत्व को बताया।
लिंग और जाति में भेद भाव न करें
बीए की छात्रा अंजुम सबा ने कहा कि आज भी समाज में लिंग और जाति का भेदभाव है। इसके आधार पर ही आधी आबादी को उपेक्षित कर दिया जाता है। बेटियों को आगे बढ़ने के लिए सामाजिक मर्यादाओं और मूल्यों का हवाला देकर रोका जाता है, जिसे बदलना होगा।
मां है वह, बेटी है वह
बीए की छात्रा मानसी गुप्ता ने कहा कि मां है वह, बेटी है वह तो कभी पत्नी है वह
जीवन के हर सुख दुख में शामिल है वह, वह शक्ति है वह प्रेरणा है वह। गीत पढ़कर बेटियों की उपयोगिता बताई।