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आंगनबाड़ी वर्कर आंदोलन से छिना गरीबों का निवाला

Fri, 23 Sep 2016 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/लखीमपुर खीरी।
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anganbadi - फोटो : amar ujala
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अतिकुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को नुकसान
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जिलेभर की आंगनबाड़ी वर्कर इन दिनों हड़ताल पर हैं, जिससे लगभग सभी आंगनबाड़ी केंद्र ठप हो चुके हैं। इस आंदोलन का सबसे बुरा असर अतिकुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ा है। 10 अगस्त को शुरू हुई हौसला पोषण मिशन बंद होने से कुपोषण के खिलाफ चल रही मुहिम की धार कुंद पड़ गई है। जिले में 3503 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, जिनमें 3403 सिर्फ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं। इन केन्द्रों पर पांच लाख 681 बच्चे पंजीकृत हैं, जिनमें 37896 बच्चे अतिकुपोषित और एक लाख 26 हजार 54 बच्चे कुपोषित चिह्नित हैं। जबकि 43248 संभावित गर्भवती महिलाएं पंजीकृत हैं। 
गोला गोकर्णनाथ। ब्लाक कुंभी की ग्राम पंचायत लाल्हापुर के गांव लक्ष्मनयती का आंगनबाड़ी केंद्र 20 दिन से बंद पड़ा है। 1200 की आबादी वाले रसूलपुर गांव के आंगनबाड़ी केंद्र पर वर्षों से आंगनबाड़ी वर्कर और अधिकारी झांकने तक नहीं गए हैं। लक्ष्मनयती के प्राथमिक स्कूल में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र में बुझे चूल्हे केंद्र के काफी दिनों से बंद होने की चुगली कर रहे हैं। जंगल के किनारे बसे रसूलपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय परिसर में स्थित आंगनबाड़ी केंद्र के संबंध में प्राथमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक रामबाबू, शीतल वर्मा, नीलम गुप्ता ने बताया कि यहां कभी कोई आंगनबाड़ी केंद्र के बारे में जानकारी करने तक नहीं आया।
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का हइ हउसला पोषण योजना
अमर उजाला टीम ने रसूलपुर गांव में जब लोगों से हौसला पोषण मिशन के बारे में जानकारी की, तो लोगों की भीड़ एकत्र हो गई। गांव के रामनरेश, ब्रजलाल, राजकुमार, लालाराम, राजाराम, कमलेश, बाबूराम, राहुल, नवल किशोर ने पूछा कि बाबूजी जा हउसला पोषण योजना का हइ। गांव मा तउ बरसन से कोई झांकइ तक नाई आवा।
लक्ष्मनजती निवासी रामू की गर्भवती पत्नी रामबेटी ने बताया कि जब कोई अधिकारी की मीटिंग होती है, तब आंगनबाड़ी वर्कर लोगों को केंद्र पर बुला ले जाती हैं। अन्य दिनों में पोषाहार नहीं दिया जाता।लक्ष्मनयती गांव निवासी ओमकार की गर्भवती पत्नी विमला ने बताया कि आंगनबाड़ी वर्कर कभी-कभी केंद्र पर बुला ले जाती हैं, जहां थोड़ी बहुत बताने के बाद खिचड़ी, पतली दलिया देकर छुट्टी कर देती हैं। कभी कभार ही दूध या फल बांटे जाते हैं।

पोषाहार का उठान प्रति माह, लेकिन वितरण नहीं
निघासन। हड़ताल पर होने के बाद भी प्रति माह पोषाहार का उठान हो रहा है, लेकिन वितरण न होने के कारण आंगनबाड़ी वर्कर्स के घरों में स्टाक लगा है। आंगनबाड़ी केंद्र नहीं चल रहे हैं। दूध और घी का वितरण नहीं किया जा रहा है। छेदुई पतिया निवासी गर्भवती नाजिया पत्नी अयूब, नूरजहां, जैकुन ने बताया कि आंगनबाड़ी वर्कर दूध और भोजन देती थीं। उनके हड़ताल पर जाने के कारण वह नहीं मिल पा रहा है। 
बांकेगंज। हड़ताल से ब्लाक बांकेगंज क्षेत्र के सभी आंगनबाड़ी केंदरों पर ताला लटका है। जिसके चलते कुपोषित बच्चों और गर्भवती महिलाओं को पुष्टाहार नहीं मिल रहा है। ब्लाक क्षेत्र में 227 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिसमें 19,270 बच्चे पंजीकृत है। 
पलियाकलां। मोहल्ला किसान प्रथम की गर्भवती महिलाएं गायत्री देवी और राधा देवी का कहना है कि आंगनबाड़ी की हड़ताल के चलते उनको दलिया, दूध और अन्य चीजें नहीं मिल पा रही हैं। मोहल्ले की अनुराधा, लकी, रुचि, खुशी को भी पुष्टाहार नहीं मिल पा रहा है।
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आंगनबाड़ी केन्द्र को बंद कर हड़ताल पर जाना आचार संहिता के लिहाज से अनुचित और गैरकानूनी है। आंगनबाड़ी वर्कर को नोटिस भेजा जा रहा है। जल्द ही सभी केन्द्र न खुले तो आंगनबाड़ी वर्कर की मानदेय आधारित सेवाएं समाप्त कर दी जाएंगी।
- अमित सिंह बंसल, सीडीओ
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