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आंगनबाड़ी केंद्रों पर नहीं पहुंच रहा है हाटकुक्ड

Sun, 01 Feb 2015 06:46 PM IST
निघासन
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इंडो-नेपाल बार्डर स्थित ब्लाक में प्रति माह हाटकुक्ड के लिए करीब 11 लाख रुपये निकलता है। 100 से अधिक क्रय केंद्रों पर बनने वाला भोजन मासूम बच्चों तक नहीं पहुंच रहा है। सीडीपीओ ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने की बात कही है।
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ब्लाक क्षेत्र में 236 आंगनबाड़ी तथा 97 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र हैं। सरकारी विद्यालयों में एमडीएम की तरह इस विभाग में भी मासूम बच्चों को भोजन देने के लिए यह योजना चलाई गई है। एनजीओ के हाथों में हाटकुक्ड का मामला सौंपने के कारण मनमाने ढंग से इस योजना को संचालित किया जा रहा है। कस्बे के बीआरसी कार्यालय परिसर में लगने वाले आंगनबाड़ी केंद्र के प्रभारी ने बताया कि जब से एनजीओ खाना बनाकर केंद्रों पर भेज रहा है तब से यहां पर बच्चों को भोजन नहीं मिला है जबकि इसकी शिकायत कई बार की गई है। त्रिकौलिया, बिनौरा, भनवापुरवा, पचपेंड़ी समेत 100 से अधिक केंद्रों पर हाटकुक्ड नहीं पहुंच रहा है। साथ ही यह भी आरोप है कि हाटकुक्कड गुणवत्ता विहीन होने के कारण बच्चे खाने से भी इंकार कर देते है।
एनजीओ प्रभारी ने भी माना नहीं पहुंचता है भोजन
एनजीओ प्रभारी नीरज ने बताया कि कई आंगनबाड़ी क्रय केंद्रों पर भोजन नहीं पहुंचता है। वहां पर हाटकुक्ड पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी। उधर सीडीपीओ पुष्पलता रस्तोगी ने बताया कि बहुत स्थानों पर हाटकुक्ड नहीं पहुंच रहा है। मामले की जांच कर रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी।
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