जिले के उपनगरों में स्थापित सीएचसी पर एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं हैं। इसके चलते कुत्ता काटने से पीड़ित मरीजों को जिला मुख्यालय पर आना पड़ रहा है। प्रतिदिन सुबह से ही जिला अस्पताल में इनकी लंबी लाइन लग जाती है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी सीएचसी पर एंटीरैबीज इंजेक्शन उपलब्ध होने का दावा कर रहे हैं।
प्रतिदिन फूलबेहड़, फरधान, हैदराबाद आदि क्षेत्रों से ग्रामीण इंजेक्शन लगवाने के लिए जिला अस्पताल पहुंचते हैं। बताते चलें कि एंटी रैबीज का इंजेक्शन चार बार लगवाना जरूरी होता हैै। सभी चारों इंजेक्शन एक माह के भीतर लगाए जाते हैं। सूत्र बताते हैं कि सीएचसी पर पैसा न देने वाले मरीजों को टरका दिया जाता है। कई मामले ऐसे भी हैं, जिनमें मरीजाें को एक साथ पांच लोगों के होने पर ही इंजेक्शन लगाने की शर्त रखी जाती है। अब एक या दो मरीज और मरीजों के आने का इंतजार कब तक करें। लिहाजा इससे भी मजबूरन मरीज जिला अस्पताल आने का विवश हैं। जिला अस्पताल के डॉ. सहदेव सचान बताते हैं कि एक इंजेक्शन वायल में पांच लोगों की खुराक होती है, जिसमें साढ़े चार रह जाती है। इसका घोल बनाने के बाद 24 घंटे के अंदर प्रयोग करना आवश्यक है। डॉ. सचान ने बताया कि प्रतिदिन 100 से 150 तक मरीज आते हैं। 27 जनवरी को 97 और 28 जनवरी को 91 मरीजों को इंजेक्शन लगाए गए थे।
उधर सीएमओ डॉ. वीएस चौहान ने बताया कि सभी सीएचसी पर एंटीरैबीज इंजेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। सप्लाई मिलने में देरी होने पर जनवरी के शुरुआत में लोकल परचेज भी कराई गई थी।
15 सीएचसी को दिए
गए 617 इंजेक्शन
चीफ फार्मेसिस्ट डॉ. एस प्रसाद ने बताया कि जनवरी के पहले पखवाड़े में दवा उपलब्ध नहीं थी। इसके बाद 15 जनवरी से अब तक 617 इंजेक्शन दिए जा चुके हैं।