कस्बे के पास अवैध खनन कर खोदे गए गड्ढे में डूबने से चार बच्चों की मौत के मामले में लापरवाही बरते जाने की खबर सात जुलाई को अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों की नींद टूटी है। प्रशासन ने बच्चों की मौत का कारण बने गड्ढे के पास संकेतक बोर्ड लगवाकर लोगों को खतरे से आगाह किया है। हालांकि अधिकारी अभी तक संबंधित ईंट भठ्ठा नहीं ट्रेस कर पाए हैं और न ही खेत मालिक का पता चला है।
एक जुलाई को खीरी टाउन के मोहल्ला हनिया टोला निवासी चार बच्चे खेलते-खेलते एक खेत में पहुंच गए थे, जहां ईंट-भट्ठे के लिए मिट्टी खोदकर छोड़े गए गड्ढे के पानी में डूबकर बच्चों की मौत हो गई थी। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर बच्चों की मौतों पर दुख तो जताया और जांच के लिए भी कहा, लेकिन कई दिन बीतने के बाद प्रशासन इसे एक हादसा मानकर भूल गया। न ईंट-भट्ठा ट्रेस किया गया और न ही घटना के बाद से फरार हुए खेत मालिक का ही पता चल पाया। प्रशासन ने खुले जानलेवा गड्ढों के खतरों से लोगों को बचाने के लिए भी कोई प्रयास नहीं किया। जिसके बाद अमर उजाला में सात जुलाई को ‘और हादसों के इंतजार में जानलेवा गड्ढे’ नामक शीर्षक से अधिकारियों की उदासीनता और लापरवाही को उजागर करते हुए प्रमुखता से खबर प्रकाशित की, जिस पर अधिकारी नींद से जागे हैं। एडीएम एसपी सिंह के निर्देश पर खीरी टाउन के इस गड्ढे पर संकेतक बोर्ड लगाया गया है। जिस पर लोगों को खतरे से आगाह करते हुए गड्ढे से दूर रहने की सलाह दी गई है। एडीएम ने बताया कि पूरे मामले की जांच एसडीएम सदर को सौंपी है। मिट्टी की खुदाई के लिए रायल्टी जमा होने संबंधी भी जांच हो रही है।