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Lakhimpur Kheri News: गांजर पर विजय के लिए आल्हा ने की थी मां आदिशक्ति अन्नपूर्णा की पूजा

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कफारा स्थित मां आदिशक्ति अन्नपूर्णा। संवाद
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धौरहरा। गांव कफारा का आदिशक्ति अन्नपूर्णा कुटी माता मंदिर ऐतिहासिक विरासत संजोए हुए है। कहा जाता है कि इस मंदिर में कई चमत्कार हुए हैं। नवरात्र में यहां दूर-दूर से आकर लोग मनौतियां मांगते हैं।
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कहा जाता है कि महोबा राज्य के आल्हा ने गांजर पर विजय प्राप्त करने के लिए यहां आकर माता रानी अन्नपूर्णा की पूजा की थी। यहां एक मात्र उत्तर मुखी माता की प्रतिमा है। जो तंत्र साधना के लिए प्रसिद्ध है। माता का ऐसा मंदिर है, जिसमें मां आदिशक्ति की प्रतिमा उत्तर मुखी है। अक्सर देवी मां की मूर्ति पूर्व की ओर होती है। इस मूर्ति की स्थापना के पीछे तंत्र साधना मानी जाती है।
संतराम भूषण दास उर्फ लोद्दड़ बाबा के मुताबिक, अपने पिता की हत्या का बदला लेने के लिए आल्हा ऊदल ने माड़ौ पर चढ़ाई करने से पहले गांव कफारा में माता आदिशक्ति अन्नपूर्णा माता की पूजा की थी। इसके बाद माड़ौ के राजा कंरिंगा के कालीकोट बहराइच स्थित किले पर हमला कर उसे युद्ध में परास्त कर गांजर पर विजय प्राप्त की थी।
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इस किले के निशान आज भी कालीकोट बहराइच में मिलते हैं। लोगों का मानना है, कि यह मूर्ति उत्तर मुखी इसलिए है कि सामने कंरिंगा की राजधानी कालीकोट थी। बाबाराम भूषण दास के मुताबिक, यहां खोदाई के दौरान काफी बड़ी तलवारें भी मिली थीं।
मंदिर के मुख्य सेवक गणेश पुरी ज्ञानी बाबा बताते हैं, यहां रात्रि में माता की पूजा के बाद मंदिर में कोई मानव जाति नहीं रुकती। रात्रि पूजन के बाद मंदिर परिसर खाली कर दिया जाता है।


मंदिर परिसर में ही संत ने ली थी अग्नि समाधि

मंदिर में रह रहे संत महावीर प्रसाद ने 23 दिसंबर 2009 में अग्नि समाधि ले ली थी। मंदिर में माता रानी के जगराते और नवरात्रि में यज्ञ अनुष्ठान श्रद्धालुओं द्वारा किया जाता है।
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