लखीमपुर खीरी। खेती-किसानी को संवारने के लिए व्यवस्थित इंफ्रास्ट्रक्चर भी जरूरी है, जिसे उपलब्ध कराने के लिए सरकार किसानों को लोन मुहैया कराएगी। इसके लिए भारत सरकार द्वारा एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड की स्थापना की गई है, जिससे चार वर्षों में पूरे भारत में एक लाख करोड़ के लोन बांटे जाने का लक्ष्य है। लोन की मदद से किसान अपने खेतों (फार्म गेट) पर प्रोसेसिंग यूनिट, राइपिंग चैंबर, पैक हाउस, गोदाम, कोल्ड स्टोरेज आदि बनवा सकेंगे।
जिला कृषि अधिकारी सत्येंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इस योजना के लिए नाबार्ड को नोडल एजेंसी नामित किया गया है, जो एग्रीकल्चर स्टार्टअप के तौर पर किसानों को जोड़ने में मदद करेगा। एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर खरीदने के इच्छुक किसान ऑनलाइन वेबसाइट एग्रीइंफ्रा डॉट डीएसी डॉट जीओवी डॉट इन पर लॉगिन करके फार्म व प्रोजेक्ट भरकर सबमिट कर सकते हैं। वेबसाइट द्वारा ही वेरीफिकेशन प्रक्रिया कराई जाएगी। आवेदन के लिए लोगों को किसी कार्यालय के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि तीन प्रतिशत ब्याज दर पर लोन मुहैया कराया जाएगा। 10 प्रतिशत मार्जिन मनी के तौर पर किसान को धनराशि व्यय करनी होगी, जबकि 90 प्रतिशत धनराशि संबंधित बैंक वहन करेगा।
आठ समितियों पर गोदाम बनाने के लिए लोन स्वीकृत
लखीमपुर खीरी। आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत सहकारी समितियों को सुदृढ़ किया जाना है, जिसके लिए सहकारिता विभाग ने 39 समितियों में 100 मीट्रिक टन क्षमता के गोदाम बनाने के लिए एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड से लोन मांगा था। नाबार्ड ने 20 समितियों में गोदाम बनाने के प्रस्ताव को स्वीकृत किया है। इनमें से आठ सहकारी समितियों में गोदाम बनाने का कार्य प्रारंभ करने के लिए पहली किस्त रिलीज होने वाली है। प्रत्येक गोदाम के निर्माण पर 20 लाख रुपये लागत आएगी। एआर कोआपरेटिव सूर्य नारायण मिश्रा ने बताया कि बिजुआ किसान सेेवा सहकारी समिति, गनेशपुर साधन सहकारी समिति, निघासन सहकारी समिति, हसनपुर कटौली समिति, ईसानगर समिति, खीरी-पीलीभीत उपनिवेश सहकारी संघ संपूर्णानगर, मूड़ा गालिब और सर्वा सहकारी समिति में गोदाम निर्माण के लिए पहली किस्त जारी की जा रही है, जिससे इनमें जल्द कार्य शुरू हो सकेगा।