लखीमपुर खीरी। विश्व लिवर दिवस के मौके पर एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है कि युवा शरीर के भीतर लिवर तेजी से बूढ़ा हो रहा है। जिस बीमारी को पहले उम्रदराज लोगों से जोड़ा जाता था, वही फैटी लिवर अब 25 से 35 वर्ष के युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है।
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने आने वाले मरीजों में प्रतिदिन करीब 20 से 30 लोगों में फैटी लिवर की पुष्टि हो रही है। चिकित्सकों के अनुसार, यह बदलाव सीधे तौर पर बिगड़ती जीवनशैली का असर है, जहां जंक फूड, सॉफ्ट ड्रिंक्स, देर रात तक जागना और शारीरिक गतिविधियों की कमी आम हो चुकी है।
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रोहित पाठक बताते हैं कि अनियमित खान-पान, तला-भुना भोजन, शराब और बढ़ता मोटापा इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं। उनका कहना है कि शुरुआती दौर में फैटी लिवर सामान्य समस्या लगता है, लेकिन समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी में बदल सकता है।
यह स्थिति केवल बीमारी ही नहीं, बल्कि बदलती जीवनशैली की एक बड़ी चेतावनी भी है। युवा वर्ग में फिटनेस के प्रति लापरवाही और गलत खानपान की आदतें शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक लिवर को धीरे-धीरे कमजोर कर रही हैं।
केस-1
बाहर का तला-भुना भोजन बना समस्या
शहर के 29 वर्षीय एक निजी कर्मचारी पेट दर्द और थकान की शिकायत लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। जांच में फैटी लिवर की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने अनियमित दिनचर्या और बाहर के तले-भुने भोजन को इसका कारण बताया।
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केस-2
शराब की वजह से फैटी हुआ लिवर
34 वर्षीय युवक को लगातार अपच और भारीपन की समस्या थी। अल्ट्रासाउंड में फैटी लिवर निकला। डॉक्टरों के अनुसार लंबे समय से फास्ट फूड और शराब सेवन इसकी वजह बना। इलाज के बाद अब युवक का स्वास्थ्य सही है।
फैटी लिवर को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है। युवाओं को समय पर जांच करानी चाहिए और खान-पान व जीवनशैली में सुधार लाना बेहद जरूरी है। नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और शराब से दूरी बनाकर इस बीमारी से बचा जा सकता है।
-डॉ. रोहित पाठक, फिजिशियन, जिला अस्पताल