लखीमपुर खीरी। सर्पदंश के बाद अधिकतर ग्रामीण क्षेत्रों में अंधविश्वास से लोगों की जिंदगी की डोर टूट रही है। झाड़-फूंक के चक्कर में समय पर चिकित्सकीय इलाज न मिलने से मरीज की हालत बिगड़ जाती है। इसके बाद एंटी स्नेक वैनम का भी असर नहीं होता।
बीते एक माह में ईसानगर क्षेत्र के अदलीसपुर गांव में चार वर्षीय बच्चे, मोहम्मदी के हरीहरा में एक व्यक्ति, नीमगांव के बेलाबोझी में पांच वर्षीय बच्ची, बेहजम क्षेत्र में एक महिला की मौत सर्पदंश से हो चुकी है। तीन दिन पहले ही निघासन क्षेत्र के एक गांव में सर्पदंश से एक महिला ने दम तोड़ दिया था। इसमें कई मामलों में मरीज को अस्पताल ले जाने के बजाय ओझाओं के पास ले जाया गया, जहां इलाज में देरी हुई और पीड़ित की जान चली गई।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सर्पदंश एक मेडिकल इमरजेंसी है। अगर समय रहते सही इलाज मिल जाए तो पीड़ित की जान बचाई जा सकती है। ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग झाड़-फूंक, ओझा-तांत्रिक के चक्कर में कीमती समय गंवा देते हैं।
-सर्पदंश के बाद ये करें
जिला अस्पताल के फिजिशियन डॉ. रोहित पाठक ने बताया कि यदि किसी को सांप डसता है तो 108 नंबर पर कॉल करके एंबुलेंस बुलाएं। व्यक्ति को शांत रहने में मदद करें, क्योंकि घबराहट से जहर तेजी से फैलता है। व्यक्ति को हिलने-डुलने से रोकें, ताकि जहर शरीर में न फैले। यदि संभव हो तो उसे लिटा दें या बैठा दें। काटने वाली जगह के आस-पास से तंग कपड़े हटा दें, क्योंकि सूजन आने पर यह परेशानी पैदा कर सकते हैं। घाव को साबुन और पानी से धो लें। घाव को साफ कपड़े से ढक दें। इसके बाद जितनी जल्दी हो सके, व्यक्ति को नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र ले जाएं। झाड़-फूंक के चक्कर में समय न गंवाए।
-