- ढाका गांव की आबादी से सटे गन्ने के खेतों में कई दिनों से ठिकाना बनाए है तेंदुआ
मैलानी रेंज की जटपुरा जंगल बीट के ढाका गांव आबादी से सटे बरौंछा नाले के पास कई दिनों से गन्ने के खेतों में अपना बसेरा बनाए तेंदुए ने बुधवार शाम करीब चार बजे एक बकरी को निवाला बनाया है। बकरी के शव के इर्द-गिर्द तेंदुए के पगचिन्ह भी दिखाई दिए हैं, जिससे ग्रामीणों में दहशत है।
बुधवार शाम करीब चार बजे बरौंछा नाले से सटे गन्ने के खेतों से निकलकर आए तेंदुए ने सड़क किनारे गांव ढाका निवासी और हरदुआ पंचायत के प्रधान रामकिशुन की बकरी पर हमला कर दिया। तेंदुए ने बकरी की गर्दन जबड़ों में दबाकर काट दी। यह देख बकरी चरा रहे बच्चे और आसपास के चरवाहे जानवर छोड़कर भाग हुए। शोरगुल मचाने पर तेंदुआ भी बकरी को बिना खाए गन्ने के खेत में घुस गया। गनीमत यह रही कि तेंदुए ने बकरी चरा रहे किसी बच्चे पर हमला नहीं किया। बाद में प्रधान ने बकरी के शव को अपने खेत में दफन कर दिया।
ग्रामीणों हैप्पी सिंह, गोल्डी गोयल, जगतार सिंह, मोहम्मद जाबिर, कालीचरन, बहादुर, साधू सिंह आदि का कहना है कि बरौंछा नाले के भदरकुंड इलाके में पिछले एक सप्ताह से बाघ के जोड़े ने अपना ठिकाना बना रखा है। इससे कुछ दूरी पर ढाका गांव आबादी के निकट गन्ने के खेतों में तेंदुआ कई बार देखा गया है। तेंदुआ और बाघ की मौजूदगी से ग्रामीण पहले से ही दहशत में थे, अब तेंदुए के आबादी के पास आ जाने से लोगों का डर और बढ़ गया है। ग्रामीण खेतीबाड़ी छोड़कर अपने पालतू पशुओं और बच्चों की रखवाली में जुट गए हैं।
रेंजर मैलानी डीएस यादव ने बरौंछा नाले के आसपास बाघों और तेंदुआ की मौजूदगी की पुष्टि करते हुए बताया कि इस बावत ग्रामीणों को पहले ही आगाह किया जा चुका है। वन विभाग की टीमें बाघ और तेंदुआ की निगरानी में लगी हुई हैं। फिर भी ग्रामीणों को सतर्क रहना चाहिए।