बाजार में सब्जियों के दाम एक बार फिर आसमान छूने लगे हैं। सब्जी मंडी में अगर कुछ सस्ता है तो वह है आलू। आलू की साथी सब्जियां हाथ नहीं लगाने दे रही हैं। प्याज गृहणियों को सबसे ज्यादा रुला रहा है। प्याज के दाम बढ़कर 65 रुपये किग्रा तक पहुंच गया है। चटनी और प्याज के साथ रोटी खाने वाले गरीबों के निवाले से प्याज भी छिन गया है। लहसुन के दाम चढ़ कर 120 से 130 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं।
हरी सब्जियों के मूल्यों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है। दाल के बाद सब्जियों पर आई महंगाई ने खाने की थाली महंगी कर दी है। सलाद से प्याज गायब हो गया है। सब्जियां प्याज के बिना बेस्वाद हो रहीं हैं। शिमला मिर्च, भिंडी, परवल, लौकी, तोरई आदि में भी आग लगी हुई है।
मौजूदा समय में सब्जियों के भाव एक नजर में
लहसुन....................120 रुपये प्रति किग्रा
हरी मटर..................140 रुपये प्रति किग्रा
प्याज...................... 65-70 रुपये प्रति किग्रा
शिमला मिर्च............80 रुपये प्रति किग्रा
टमाटर.....................40 रुपये प्रति किग्रा
भिंडी........................20 रुपये प्रति किग्रा
लौकी........................30 रुपया प्रति किग्रा
तोरई........................40 रुपया प्रति किग्रा
टिंडा.........................40 रुपया प्रति किग्रा
क्या कहती हैं गृहणियां
महाराजनगर की ज्योति कहती हैं कि सब्जियों के मूल्य पर मौसम का असर हो सकता है लेकिन प्याज और लहसुन के मूल्यों में बढ़ोतरी समझ में नहीं आ रही है। इसके पीछे सरकार की नीतियां भी जिम्मेदार हैं। हाथीपुर कोठार की रजनी का कहना है कि सब्जियों के महंगा होने से रसोई का बजट गड़बड़ा गया है। नई बस्ती की चांदनी का कहना है दाल पहले से महंगी है ऊपर से सब्जियों के महंगा होने ने परेशानी बढ़ गई है। मिश्राना मोहल्ले की सुमन का भी यही कहना है।