ग्रामीण पाइप पेयजल योजना में जलनिगम और ठेकेदारों की मनमानी नहीं चलेगी और न ही बिना कार्य कराए ओवरहेड टैंक, ग्राम पंचायतों को हस्तांतरित किए जा सकेंगे। मुख्य विकास अधिकारी नितीश कुमार ने पेयजल योजनाओं की जांच और उनकी निगरानी के लिए कमेटी गठित कर दी है। इस कमेटी के स्थलीय सत्यापन में पाई गई खामियों को दूर करने के बाद ही जल निगम ओवरहेड टैंकों को ग्राम पंचायत को साैंप सकेगा।
सीडीओ के निर्देश पर इस कमेटी में डीडीओ, ईई नलकूप और एई लघु सिंचाई विभाग को शामिल किया गया है। गौरतलब है कि पूर्व में जलनिगम द्वारा ग्रामीण पाइप पेयजल योजना के अंतर्गत बड़ागांव, चकई, पयाग, बेलिहान, मजरा गौरी, ईसानगर सहित तमाम जगहों पर कई वर्ष पहले करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए ओवरहेड टैंकों और पाइप लाइनों में लीकेज और पानी सप्लाई न होने की समस्या सामने आई थी, जिसकी वजह से स्वच्छ पेयजल ग्रामीणों के लिए सपना बना हुआ है। अमर उजाला ने पेयजल योजना में मिलीं खामियों को प्रमुखता से उजागर किया था। जिसमें आधे-अधूरे कामों की वजह से योजनाओं में घपला किए जाने की बात सामने आई थी। सीडीओ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जलनिगम द्वारा कराए गए कार्यों की जांच के लिए कमेटी का गठन कर दिया है। सीडीओ ने बताया कि पहले जलनिगम कार्य कराने के बाद ओवरहेड टैंक ग्राम पंचायत को हैंडओवर कर दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं हो सकेगा। कमेटी स्थलीय सत्यापन कर अपनी रिपोर्ट सौपेगी, जिसमें खामियां मिलने पर उसे दुरुस्त कराने के बाद ही ग्राम पंचायतों को हैंडओवर किया जा सकेगा। सीडीओ ने इस बाबत जलनिगम के अधिशाषी अभियंता विनय पाल को भी पत्र भेजकर अवगत करा दिया है। ईई ने बताया कि पेयजल योजना के तहत कराए गए कार्यों की जानकारी अधिकारियों को दी जा रही है।