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Lakhimpur Kheri News: दुधवा में गैंडों की गणना के बाद संख्या 51 तक पहुंची

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दुधवा में गैंडा गणना को लेकर घूमते हाथी। स्रोत डीटीआर
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पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क में गैंडा पुनर्वास परियोजना फेज वन व टू में गैंडों की गणना का कार्य 15 से 17 अप्रैल को किया गया। दक्षिण सोनारीपुर व बेलरायां रेंज में स्थित दोनों परियोजनाओं में हाथियों के साथ सात टीमों ने गणना कार्य संपन्न कराया था। इसमें 2023 की तुलना में इस बार गैंडों की संख्या में इजाफा हुआ है। शिशु, वयस्क व उपवयस्क गैंडों को शामिल करते हुए दोनों परियोजनाओं के गैंडा परिवार में गैंडों की संख्या 51 पहुंच गई है। इसकी आधिकारिक पुष्टि भी अधिकारियों द्वारा की गई है।
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दुधवा नेशनल पार्क की दक्षिण सोनारीपुर व बेलरायां रेंज में गैंडा पुनर्वास परियोजना के तहत 15 से 17 अप्रैल को सात टीमों द्वारा गैंडा गणना 2025 का कार्य संपन्न कराया गया था। गणना कार्य से पहले प्रशिक्षण देने का कार्य किया गया था। इसमें डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के रोहित रवि, डाॅ. मुश्ताक तलहा, अपूर्व गुप्ता, विपिन सैनी, संदीप कुमार आदि के साथ चारा कटर व महावत शामिल रहे थे।
15 अप्रैल से शुरू हुआ गणना कार्य दुधवा वाॅर्डेन महावीर सिंह, बेलरायां वाॅर्डेन दीपक कुमार पांडेय के साथ ही विश्व प्रकृति निधि के डाॅ. मुदित गुप्ता की देखरेख में शुरू हुआ। हाथियों के जरिए गैंडा परियोजना के दोनों फेजों में जाकर वन टीमों ने कार्य किया और गैंडों की गणना करने का कार्य शुरू किया था। 17 अप्रैल को कार्य खत्म होने के बाद इनकी गिनती निकालने के लिए कई संसाधनों का प्रयोग किया। इसके बाद पार्क प्रशासन द्वारा 2025 में दुधवा में मौजूद गैंडों की गिनती 51 बताई गई है।
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दुधवा के डीडी/ वन संरक्षक डाॅ. रंगाराजू टी ने बताया कि दुधवा में गैंडों की संख्या 51 पहुंच गई है। इसमें 39 वयस्क (जिसमें 15 नर, 23 मादा) व एक अज्ञात, छह उपवयस्क (जिसमें दो नर व दो मादा के साथ दो अज्ञात) गैंडे शामिल हैं। एक से तीन वर्ष के छह गैंडा शिशु भी इन दोनों परियोजनाओं में विचरण कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व सन् 2023 में हुई गणना में यहां 46 गैंडों की संख्या ज्ञात हुई थी।



किशनपुर में घायल बाघिन को किया जाएगा ट्रैंकुलाइज
- सैलानियों के कैमरे में हुई थी कैद, तब से की जा रही है निगरानी
संवाद न्यूज एजेंसी

पलियाकलां। दुधवा नेशनल पार्क की किशनपुर रेंज में एक बाघिन घायल अवस्था में दिखी थी। प्रधान मुख्य वन संरक्षक से मिले आदेशों के बाद अब पार्क प्रशासन उक्त बाघिन को बृहस्पतिवार को ट्रैंकुलाइज कर उसका इलाज करेगा।

दुधवा के डीडी डाॅ. रंगाराजू टी ने बताया कि किशनपुर रेंज में एक बाघिन के अभी कुछ सैलानियों ने फोटोग्राफ लिए थे। इसमें वह घायल प्रतीत हो रही थी। इसके बाद चिकित्सा टीम ने उसकी निगरानी शुरू कर दी थी। अब आठ मई बृहस्पतिवार को बाघिन को ट्रैंकुलाइज किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि जब तक घायल बाघिन को कब्जे में नहीं लिया जाता है तब तक किशनपुर रेंज के किशनपुर वन्यजीव विहार रोड नंबर 17, फायरलाइन व बेलडांडा में पर्यटन क्षेत्र बाधित कर दिया गया है। इस तरफ किसी भी सैलानी व जिप्सी को आने की इजाजत नहीं दी गई है।







शुक्लाफांटा पार्क में काले हिरनों की संख्या बढ़ी



धनगढ़ी (नेपाल)। भारतीय सीमा से लगे नेपाल के कंचनपुर जिले के शुक्लाफांटा राष्ट्रीय पार्क में लुप्तप्राय काले हिरनों की संख्या में इजाफा हुआ है। करीब 12 वर्ष पूर्व ललितपुर के चिड़ियाघर से लाकर पार्क में छोड़े गए 42 काले हिरनों की संख्या बढ़कर 306 पहुंच गई है।



भारत के बनवसा बाॅर्डर से सटे नेपाल के कंचनपुर जिले में स्थित शुक्लाफांटा राष्ट्रीय पार्क बारहसिंघों की अधिक संख्या के लिए प्रसिद्ध है। अब इसमें लुप्तप्राय काले हिरनों की संख्या भी दिन प्रतिदिन बढ़ रही है।



पार्क के सहायक संरक्षण अधिकृत मनोज ऐर ने बताया कि पार्क में करीब 12 साल पूर्व नेपाल के ललितपुर जिले के चिड़ियाघर से और 2016 में बर्दिया जिले के खैरापुर से 42 काले हिरनों को लाकर छोड़ा गया था। इस बार उनकी गणना में काले हिरनों की संख्या 306 पहुंच गई है। इसमें 117 व्यस्क नर व 144 व्यस्क मादा के साथ 45 नर व मादा बच्चे हैं। इन्हें हीरापुर में 60 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में तार फैंसिंग कर बसाया गया है। बता दें कि पिछले वर्ष इसकी संख्या केवल 251 थी। संवाद

दुधवा में गैंडा गणना को लेकर घूमते हाथी। स्रोत डीटीआर

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