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Lakhimpur Kheri: कोर्ट के आदेश पर घर गिराने पहुंची प्रशासन की टीम, किसान परिवार समेत टंकी पर चढ़ा, हंगामा

Mon, 16 Mar 2026 05:58 PM IST
Mukesh Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
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परिवार के साथ टंकी पर चढ़ा किसान - फोटो : संवाद
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लखीमपुर खीरी के ईसानगर थाना क्षेत्र के हसनपुर कटौली गांव में सोमवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब अदालत के आदेश पर प्रशासन की टीम बृजेश सिंह का मकान गिराने पहुंची। कार्रवाई की सूचना मिलते ही बृजेश सिंह अपने परिवार के साथ गांव स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गए। दो घंटे की मान-मनौव्वल के बाद उन्हें नीचे उतारा गया।

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सोमवार सुबह एसडीएम शशिकांत मणि, सीओ शमशेर बहादुर सिंह सहित प्रशासन की टीम अदालत के आदेश के अनुपालन में पुलिस बल के साथ गांव पहुंची थी। जैसे ही मकान गिराने की कार्रवाई शुरू करने की तैयारी हुई तो बृजेश सिंह परिवार सहित पानी की टंकी पर चढ़ गए। इससे मौके पर अफरातफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए।

इसी दौरान किसान यूनियन (टिकैत गुट) के जिलाध्यक्ष दिलबाग सिंह अपने समर्थकों के साथ मौके पर पहुंच गए और कार्रवाई के विरोध में धरने पर बैठ गए। उन्होंने प्रशासन से कार्रवाई रोकने और पीड़ित परिवार को न्याय देने की मांग की।
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करीब दो घंटे तक प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस ने समझाने का प्रयास किया। काफी मान-मनौव्वल के बाद बृजेश सिंह और उनके परिवार को टंकी से नीचे उतारा गया। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। प्रशासन ने घर को खाली कराने के बाद बुलडोजर चलाने की तैयारी कर रही है। 

कटान पीड़ित बोले, बसने को खरीदी थी राजा साहब से जमीन
कटान पीड़ितों के अनुसार जिस जमीन पर वे आकर बसे, वह पहले जगदंबा पुत्र राजनारायण के नाम दर्ज थी। वर्ष 2011 में वसीयत के आधार पर यह जमीन राजा अभिनाश सिंह और इरा सिंह के नाम दर्ज हो गई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने राजा अभिनाश सिंह से जमीन खरीदी थी, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हो सकी। बाद में शेष जमीन शिवशंकर सेठ को बेच दी गई और 12 अगस्त 2015 को बैनामा कर दिया गया।

आरोप है कि बैनामे में चौहद्दी गलत दर्ज कराई गई। वर्ष 2015 में ही शिवशंकर सेठ ने मुकदमा दायर कर दिया। लंबी सुनवाई के बाद 22 जनवरी 2026 को अदालत ने ब्रजेश सिंह के मकान को गिराने का आदेश दे दिया। बताया जा रहा है कि जमीन को लेकर राजा अभिनाश सिंह और शिवशंकर सेठ के बीच भी न्यायालय में वाद लंबित है।

ग्रामीणों का कहना है कि जिस परिवार का मकान गिराया जाना है, वह बेहद गरीब है। परिवार में पत्नी सहित चार बेटियां और एक बेटा है। ऐसे में कार्रवाई होने पर पूरा परिवार खुले आसमान के नीचे आ जाएगा। ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की दोबारा जांच कराने की मांग की है। 
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'पहले बसाए फिर घर गिराए प्रशासन'
भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के जिलाध्यक्ष दिलबाग सिंह अपनी टीम के साथ बृजेश सिंह के बचाव में धरना पर बैठ गए। उन्होंने कहा कि पहले कटान पीड़ित किसान को बसाने की व्यवस्था करें, बाद में घर गिराने की कार्रवाई की जाए। एसडीएम शशिकांत मणि ने कानून का हवाला देकर उन्हें समझाते हुए आवास और आवासीय पट्टा देने का भरोसा दिलाया। 

शिवशंकर सेठ के पुत्र विकास सेठ ने बताया कि उन्होंने जो जमीन खरीदी थी, उस पर बृजेश सिंह ने अबैध कब्जा किया हुआ है, सिविल कोर्ट और हाईकोर्ट से भी वह मुकदमा जीते हैं। बेदखली का आदेश है, प्रशासन जब भी कब्जा दिलाने जाता है तो लोग मारपीट पर अमादा हो जाते हैं। इससे पहले कोर्ट कमीशन टीम पर भी हमला किया था। उन्हें कोर्ट और प्रशासन पर पूरा भरोसा है, न्याय मिलेगा। 

एसडीएम शशिकांत मणि ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होनी है, विरोध के चलते कार्य नहीं हो पा रहा था। अभी कार्रवाई चल रही है। अदालत के आदेश का अनुपालन कराया जाएगा।


 
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