लखीमपुर खीरी। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियों ने मंगलवार को शैक्षिक और सामाजिक मुद्दों पर कलक्ट्रेट पहुंचकर डीएम को ज्ञापन सौंपा। इससे पहले सभी पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कलक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया।
काफी देर तक जिला प्रशासन की कार्य प्रणाली के खिलाफ नारेबाजी की। उन्होंने शैक्षिक, सामाजिक, स्वास्थ्य समेत तमाम मुद्दों को लेकर जिला प्रशासन को घेरा। बाद में डीएम के मौके पर पहुंचने पर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपकर निस्तारण कराने की मांग की। चेतावनी दी कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं तो बड़ा आंदोलन होगा।
ज्ञापन के माध्यम से मांग की गई कि समाज कल्याण विभाग के छात्रावास में संचालित वन स्टॉप सेंटर बंद हो व उसमें दूरस्थ क्षेत्र से आने वाले विद्यार्थियों के लिए रहने की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। राजकीय पुस्तकालय में नवीन पुस्तकों की व्यवस्था और बैठने व स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था कराई जाए। पलिया में नवनिर्मित राजकीय डिग्री कॉलेज को सुचारु रूप से संचालित किया जाए।
राजकीय आईटीआई का फूलबेहड़ ब्लॉक में नवनिर्मित भवन फिर से जर्जर होने की अवस्था में आ गया है और अभी तक उसको सुचारु रूप से संचालित नहीं किया जा सका।
ज्ञापन में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर मांग की है कि जिले में संचालित हो रहे अवैध रूप से पैथोलॉजी व निजी अस्पतालों पर कार्रवाई की जाए। इसके अलावा छात्राओं के काॅलेज के आसपास सुरक्षा बढ़ाई जाए।
इस दौरान जिला संयोजक अजय पांडेय, प्रांतीय सह मंत्री लक्ष्मी पांडेय, विभाग संगठन मंत्री प्रखर मिश्रा, सह जिला संयोजक सुधांशु प्रजापति, नगर मंत्री सौम्य शुक्ला, प्रांत कार्यकारिणी सदस्य पार्थ मिश्रा, संजना गौतम, सचिन राज, हर्षित शुक्ला, हर्ष भारद्वाज, कुंजबिहारी, दीपक पांडेय, वर्षा सिंह, सवितार गोस्वामी सहित तमाम कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यकर्ता अड़े...कार्यालय से डीएम को आना पड़ा बाहर
डीएम कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी डीएम को ज्ञापन देने की मांग पर अड़ गए। कई अधिकारियों के मनाने पर भी नहीं माने तो मजबूरन डीएम को बाहर आकर ज्ञापन लेना पड़ा। एबीवीपी पदाधिकारियों से ज्ञापन लेने एडीएम संजय सिंह पहुंचे तो सभी ने एक सुर में यह कहते हुए ज्ञापन देने से मना कर दिया कि डीएम इतने छात्र छात्राओं से मिलने बाहर नहीं आ सकती हैं तो वह ज्ञापन पर लिखी हुई समस्याएं क्या दूर करेंगी। सभी कार्यकर्ता डीएम मैम बाहर आओ के नारे लगाने लगे, जिसके बाद डीएम ने बाहर आकर ज्ञापन लिया।