एक वर्ष पूर्व जो योजना बंद हो गई है, उस योजना में अनुदान लेने के लिए सोमवार को करीब सौ से अधिक महिलाएं जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग कार्यालय में उमड़ पड़ीं। जिले के दूरदराज क्षेत्रों से आईं ये महिलाएं करीब तीन घंटे तक फार्म जमा करने के लिए विभागीय कर्मचारियों से उलझी रहीं। हालात ऐसे हो गए कि महिलाओं को योजना के बंद होने का भरोसा दिलाने के लिए कार्यालय के बाहर नोटिस चस्पा करनी पड़ा।
हुआ यूं कि सुबह दस बजे कलक्ट्रेट स्थिति जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग कार्यालय खुलते ही मोहम्मदी, मितौली, फूलबेहड़, महेवागंज, बिजुआ समेत कई क्षेत्रों से करीब सौ से अधिक महिलाएं हमारी बेटी उसका कल योजना का अनुदान पाने के लिए उमड़ पड़ीं। महिलाओं ने 50-50 रुपये खर्च कर कंप्यूटर से प्रार्थना-पत्र निकलवाया और उसके साथ अन्य दस्तावेज भी लगाया, लेकिन अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के कर्मचारियों ने उनका आवेदन लेने से मना कर दिया। महिलाओं का कहना था कि दो दिन पहले तक इस योजना के अंतर्गत फार्म जमा किए गए हैं। वहीं विभागीय कर्मचारी इस बात पर अड़े थे कि हमारी बेटी उसका कल योजना वर्ष 2014 में ही बंद हो चुकी है। जिसका फार्म तक मिलना बंद हो गया है। करीब तीन घंटे तक चली गहमागहमी के बाद विवश होकर कर्मचारियों ने कार्यालय के बाहर नोटिस चस्पा किया तब जाकर महिलाएं वहां से गईं। वहीं जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी प्रियंका अवस्थी ने बताया कि हमारी बेटी उसका कल योजना एक साल पहले बंद हो गई। डीएम कार्यालय के बाहर इस संबंध में नोटिस बोर्ड भी चस्पा किया गया है। योजना के बंद होने के बाद आवेदन कैसे लिया जा सकता है।
निजी फायदे के लिए छली गईं महिलाएं
कचहरी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि योजना बंद होने के बाद भी इसे महज निजी फायदे के प्रचारित किया गया। जिसके कारण दूरदराज गांवों से महिलाओं का समूह कचहरी योजना का लाभ लेने पहुंच गया। जहां फार्म और स्टांप के नाम पर महिलाओं से ठगी की गई। छुटभैया नेताओं और कुछ दलालों के कारण महिलाओं को न सिर्फ निराशा हाथ लगी बल्कि उनका पैसा और समय भी बर्बाद हुआ।