कथा सुनाते हुए पंडित राजेश दीक्षित। स्रोत आयोजक
लखीमपुर खीरी। शारदा नगर रोड स्थित श्री वेदमाता गायत्री प्रज्ञा पीठ रौली रामापुर में पांच कुंडलीय गायत्री महायज्ञ के चौथे दिन शनिवार को यज्ञाचार्य कथा व्यास पंडित राजेश दीक्षित ने श्रीमद् प्रज्ञा पुराण की कथा सुनाई।
कहा कि भक्ति समर्पण का नाम है। सच्चा भक्त कभी छल का व्यवहार नहीं कर सकता। प्रभु केवल प्रेम के भूखे हैं। जब तक हृदय में काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार का बसेरा है, तब तक वह मन से मंदिर में नहीं आ सकता। सच्चा समर्पण मीरा ने भी किया था, तो भगवान उनके साथ नाचते-गाते थे। उनका विष का प्याला भी अमृत हो गया। सर्प पिटारी फूलों की माला बन गई।
जब समर्पण भाव जागता है, तब भक्त और भगवान एकाकार हो जाते हैं। इस दौरान पंडित राम शर्मा, भगवती देवी शर्मा, पंडित अवधेश बाजपेई, अभिनव बाजपेई, वैभव वाजपेई, पंडित अवधेश त्रिवेदी आदि मौजूद रहे। श्री वेदमाता गायत्री प्रचार समिति के संस्थापक अध्यक्ष पंडित राजेश दीक्षित ने बताया कि रविवार को कथा का विश्राम है। इस दिन भंडारे का भी आयोजन होगा।