नाव के जरिए दलदल में फंसे बाघ की निगरानी करती वन कर्मियों की टीम। स्त्रोत- वन विभाग।
बांकेगंज (खीरी)। शारदा नदी का जलस्तर घटने के बाद दलदल में फंसा बाघ अब धीरे-धीरे जंगल की ओर बढ़ रहा है। पिछले 24 घंटे में उसने 1.70 किलोमीटर की दूरी तय की है। जंगल अब करीब एक किलोमीटर दूर है।
हालांकि, रास्ते में जमा कीचड़ वन विभाग के लिए बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू करने में सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। गोला वन रेंज की बिजुआ बीट में बेल्हा सिकटिहा गांव के पास ग्रामीणों ने शनिवार दोपहर दलदल में फंसे बाघ को देखा था। सूचना पर वन विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और उसकी निगरानी शुरू की। शारदा नदी का जलस्तर घटने से काफी दूरी तक कीचड़ जमा है। इस कारण मौके पर न तो पिंजरा लगाया जा सकता है और न ही बाघ को बेहोश किया जा सकता है।
वन विभाग की टीमें नाव और ड्रोन के जरिये बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रही हैं। रविवार सुबह उड़ाए गए ड्रोन में बाघ गांव के पास गन्ने के खेत में दिखाई दिया। निगरानी में पता चला कि वह घटना स्थल से 1.70 किलोमीटर दूर जंगल की ओर बढ़ चुका है।
वनाधिकारियों के अनुसार बाघ जंगल से रास्ता भटककर इस क्षेत्र में पहुंचा है। उसे सुरक्षित तरीके से प्राकृतिक वास की ओर भेजने के प्रयास किए जा रहे हैं।
बाघ के लिए भोजन की कमी नहीं
दक्षिण खीरी वन प्रभाग के डीएफओ तापस मिहिर ने बताया कि बाघ के भोजन के लिए क्षेत्र में हिरण और जंगली सूअर पर्याप्त संख्या में हैं। बाढ़ की वजह से पानी भी पर्याप्त है। बाघ जहां फंसा है, वहां से करीब 1000 मीटर तक दलदल है। उसकी निगरानी के लिए दो कैमरे लगा दिए गए हैं और दो कैमरे सुबह लगाए जाएंगे। वन कर्मियों की टीमें गठित कर बाघ की 24 घंटे लगातार निगरानी की जा रही है। एक टीम बाघ से ही थोड़ा दूर माैजूद है।