लखीमपुर खीरी। करीब 45 लाख की आबादी वाले जिले में मरीजों के लिए न तो सीटी स्कैन की व्यवस्था है और न ही एमआरआई की। करीब दो साल पहले एक रुपये के पर्चे पर जिला अस्पताल में सीटी स्कैन होता था, लेकिन अस्पताल के मोतीपुर जाने के बाद से यह सुविधा भी बंद हो गई। एमआरआई के लिए मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में बुधवार को करीब 1140 मरीजों की ओपीडी हुई। हालांकि यहां प्रतिदिन करीब 1200-1500 मरीज प्रतिदिन इलाज के लिए आते हैं। इसमें कई ऐसे गंभीर मरीज आते हैं, जिन्हें सीटी स्कैन व एमआरआई जांचों की जरूरत पड़ती है। हालांकि पहले जिला अस्पताल में एक रुपये के पर्चे पर ही सीटी स्कैन की जांच हो जाती थी, लेकिन जिला अस्पताल के मोतीपुर पहुंचते ही करीब डेढ़ साल यह सुविधा भी बंद हो गई। जिला अस्पताल में सीटी स्कैन का बोर्ड तो लगा, लेकिन मरीजों को यहां सिर्फ मायूसी ही मिलती है।
वहीं एमआरआई की सुविधा की सुविधा अभी तक जिले में नहीं शुरू हो पाई है। जिला अस्पताल में यह जांचें न होने के कारण मरीजों को मजबूरन लैब में करीब 2500 से तीन हजार रुपये खर्च कर जांचें करानी पड़ रहीं हैं। या फिर जांच के लिए 135 किलोमीटर दूरी तय कर लखनऊ तक सफर करना पड़ रहा है। इससे मरीजों को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारियों का कहना है कि मेडिकल कॉलेज का कार्य करीब पूरा होने का है। मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद यह सुविधा मिलने लगेंगी।
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प्राइवेट जांच के लिए इतनी खर्च होती है रकम
एमआरआई - करीब 6500 से शुरुआत
सीटी स्कैन - 2700-3000
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मेडिकल कॉलेज जल्द ही शुरू होने वाला है। सीटी स्कैन मशीन लगवाने की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही मरीजों को इसका लाभ मिलने लगेगा। इसके अलावा अन्य जांचें भी शुरू हो जाएंगी।
डॉ. वाणी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज