पिछले वर्षों की तुलना में इस बार विदेशी सैलानियों की संख्या रही ज्यादा
दुधवा को राजस्व में हुआ फायदा, पार्क प्रशासन रोमांचित
इस बार दुधवा नेशनल पार्क के पर्यटन सत्र 2016-17 में हर साल की तुलना में विदेशी सैलानियों की भरमार रही। इससे साफ जाहिर होता है कि दुनिया में दुधवा नेशनल पार्क की एक अलग ही पहचान बन चुकी है। पिछले साल की तुलना में इस बार पार्क भ्रमण के लिए 28 विदेशी सैलानी ज्यादा आए हैं। विदेशी सैलानियों को दुधवा का सौंदर्य खूब भाया। इसके साथ ही पिछले साल के मुकाबले इस बार दुधवा के राजस्व में भी बढ़ोत्तरी हुई।
दुर्लभ प्रजाति के वन्यजीवों के दीदार करने और बाघ, गैंडा आदि के स्वच्छंद विचरण को देखने के लिए भारत के विभिन्न अंचलों और राज्यों के साथ ही विदेशी सैलानियों को भी दुधवा नेशनल पार्क का सौंदर्य खूब भाता है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्षो की अगर तुलना की जाए तो देशी और विदेशी सैलानियों की संख्या हर साल बढ़ती ही जा रही है। वहीं राजस्व में भी लगातार इजाफा हो रहा है।
सबसे बड़ी बात तो यह है कि पिछले कुछ वर्षों में विदेशी सैलानियों का पार्क के प्रति आकर्षण कम दिखाई देता था, लेकिन बीते तीन वर्षों से विदेशी सैलानी भी दुधवा पार्क की तरफ आकर्षित होने लगे है। इसका मुख्य कारण है कि 880 वर्ग किमी एरिया में फैला दुधवा पार्क कई दुर्लभ प्रजाति के जीवों के साथ सैकड़ों किस्म की वनस्पतियों को अपने में समेटे हुए है। वहीं विश्व की अनूठी गैंडा पुर्नवास परियोजना यहां चल रही है, जो पूरे विश्व में विख्यात है। पार्क की सुंदरता और जैव विविधता को देखने के लिए वर्ष 2015-16 में जहां 84 विदेशी सैलानी यहां पहुंचे थे जो इस बार 2016-17 में यह संख्या बढ़कर 112 पहुंच गई है। इसमें आस्ट्रेलिया, डेनमार्क, न्यूजीलैंड सहित अन्य देशों के पर्यटक शामिल रहे। वर्ष 2015-16 में 40 लाख चार हजार 379 रुपए का राजस्व पार्क को प्राप्त हुआ था। जो सत्र 2016-17 में बढ़कर 45 लाख 42 हजार 695 रुपए पहुंच गया है। हालांकि पिछले सत्र में तत्कालीन डीएम किंजल सिंह और डीडी पीपी सिंह के बीच हुए विवाद से पर्यटन में कुछ घाटा तो हुआ था। लेकिन इस बार वह पूरा होता दिख रहा है। पार्क के बंद होने के मात्र कुछ ही घंटे शेष रह गए हैं। जिससे अभी तक सैलानियों का तांता पार्क में लग रहा है। जिससे पार्क प्रशासन भी रोमांचित है।