फरधान थाना क्षेत्र के गांव ओदरहना की घटना, पुलिस ने पति को हिरासत में लिया
अमर उजाला ब्यूरो
फरधान। पुलिस ने थाना क्षेत्र के ओदरहना गांव में चाकू के ताबड़तोड़ प्रहारों से की गई महिला की हत्या के मामले में सनसनीखेज खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, अवैध संबंधों में बाधक बन रही महिला को उसी के पति ने मौत के घाट उतार दिया और शव खेत में छोड़कर शोर मचाने लगा। इस मामले में पुलिस ने मृतका के भाई की तहरीर पर पति के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर उसे हिरासत में ले लिया है।
बता दें कि ओदरहना गांव निवासी सुनील वर्मा उर्फ पल्लू की पत्नी विनीता (34) की चाकू से घाेंपकर शनिवार की रात करीब साढ़े नौ बजे हत्या कर दी गई थी। बताया जाता है कि सूचना पाकर जब पुलिस मौके पर पहुंची तो पति सुनील कुमार पत्नी के शव के पास बेहोश पड़ा था। पुलिस के पहुंचने पर किसी तरह उसे होश में लाया गया, पूछताछ के दौरान पुलिस का शक सुनील पर ही गहराया, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया। शनिवार रात में घटना की सूचना मिलने पर एसपी सत्येंद्र सिंह, एएसपी बालेंदु भूषण और सीओ सिटी ने मौके पर पहुंचकर मुआयना किया। पुलिस का कहना है कि मृतका के शरीर पर आभूषण थे। इससे यह साफ है कि महिला को बदमाशों ने नहीं मारा है। अगर ऐसा होता तो बदमाश जेवर लूट कर ले गए होते। वहीं मृतका के भाई मानसिंह वर्मा उर्फ बब्बू ने बहनोई सुनील पर दूसरी महिला के साथ अवैध संबंधों का आरोप लगाते हुए बहन की हत्या करने की तहरीर पुलिस को दी है। पुलिस ने सुनील के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच में जुट गई है। एसओ राजेश कुमार का कहना है कि हत्याकांड की जांच के दौरान अवैध संबंधों की बात सामने आई है, अभी कई बिंदुओं पर जांच करना बाकी है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही पूरा मामला सुलझा लिया जाएगा।
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पति के पैंट में लगे खून से खुला रहस्य!
सुनील के बड़े पुत्र आशीष ने बताया कि पापा ने 5000 रुपये का पड्डा बेचा था, वहीं रुपये बैंक में जमा करने की बात कहकर मम्मी को साथ लेकर लखीमपुर गए थे। सुनील के साले विनोद निवासी गांव मथना का कहना है कि लखीमपुर से लौटते समय सुनील, विनीता को लेकर गांव भी आया था। ग्रामीणों का कहना है कि सुनील ने बताया कि रात में घर लौटते समय गांव के कुछ पहले दो बाइक लिए खड़े चार लोगों ने उन्हें रोक लिया और जबरन रोड के किनारे ले जाने लगे। इस बीच सुनील बदमाशों के चुंगल से खुद को मुक्त कर गांव की ओर शोर मचाता हुआ भागा। रास्ते में खेत की सिंचाई कर रहे एक ग्रामीण से उसने बताया कि बदमाश उससे लूट-पाट कर रहे थे और उसकी पत्नी को पकड़ ले गए हैं। जब यह बात ग्रामीणों को पता चली तो पूरा गांव लामबंद होकर लाठी-डंडे लेकर सुनील के साथ घटनास्थल पर पहुंच गया और महिला की तलाश शुरू कर दी। थोड़ी देर बाद घटनास्थल से करीब पांच सौ मीटर पीछे रोड के किनारे रुकुंदीपुर निवासी एक किसान के खेत में विनीता की लाश पड़ी थी। महिला को बड़ी बेरहमी से मारा गया था। उसके शरीर में जगह-जगह चाकुओं को घोपा गया था। गले को किसी धारदार हथियार से रेता गया था। सुनील के शरीर पर चोट का एक भी निशान नहीं था। उसकी पैंट में लगा खून और बयान मामले में उसकी भूमिका को संदिग्ध बना रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने उसे मौके से ही हिरासत में ले लिया।
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आरोपी पति ने अपने रिश्तेदार पर मढ़ा आरोप
हवालात में बंद सुनील अपने को बेकसूर बताते हुए पिपराकरमचंद निवासी अपने एक रिश्तेदार पर हत्या करने का आरोप मढ़ रहा है। उसका कहना है जब वह पत्नी के साथ लौट रहा था, तो रिश्तेदार अपने परिवार के कई अन्य लोग रास्ते में खड़े थे और हमें जबरन रोककर लूटपाट करने लगे। सुनील के मुताबिक, रिश्तेदार ने ही उसकी पत्नी की हत्या की है।
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मां को खोने के गम में बेसुध हैं बच्चे
पत्नी की हत्या के आरोप में पिता है हवालात में
नीरज वर्मा
फरधान। उदरहना गांव में मां को खोने के गम में बच्चे बेसुध हैं। मासूमों के चेहरों पर पसरी मासूमियत और दर्द को देखकर आंखें छलछला जाती हैं। उन्हें पता है दर्द के पलो में अपने आंचल में छिपा लेने वाली मां अब कभी नही आएगी, लेकिन मासूम अपने पापा के घर आने की राह ताक रहे हैं। उन्हें यह नहीं मालूम कि उनकी मां के कत्ल के जुर्म में उसके पापा हवालात में बंद हैं।
आंखों में अथाह दर्द लिए मासूम चुपचाप एक पुरानी खाट पर बेसुध होकर पड़े हैं। उनके चेहरे को देखकर उनकी पीड़ा को समझा जा सकता है। मां को खोने का तो उन्हें गम था ही, भूख ने भी उन्हें विचलित कर रखा है। तीनों बच्चे भूखे-प्यासे हैं, लेकिन गांव वालों ने उन्हें खाना पूछने की जरूरत नहीं समझी है। यहां तक कि गांव के दूसरे छोर पर रह रहे रिश्तेदारों ने भी उनकी कोई सुध नहीं ली है। सुनील के बड़े बेटे आशीष (12) ने बताया मम्मी ने शनिवार को सुबह खाना बनाया था, तब ही खाना खाया था, उसके बाद पापा के साथ वह लखीमपुर चली गईं। जो खाना बचा था वह शाम को तीनों भाइयों ने मिलकर थोड़ा-थोड़ा खा लिया, लेकिन रविवार सुबह खाने को कुछ नहीं था। इस पर कुछ लोगों ने गांव से उन्हें बिस्कुट मंगाकर खिलाए। आशीष ने बताया कि पापा का गांव में किसी से झगड़ा नहीं था। उन्होंने मम्मी-पापा के बीच भी किसी झगड़े से इंकार किया। आशीष कैमहरा के एक स्कूल में कक्षा छह, उससे छोटा दिनेश (11) और रोहित (10) गांव के ही प्राइमरी स्कूल में पढ़ते हैं।