फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

तेज बुखार से बालक की मौत

Sun, 27 Apr 2014 05:30 AM IST
Lakhimpur
विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन

उल्टी-दस्त से परेशान कई बच्चे जिला अस्पताल में भर्ती
अमर उजाला ब्यूरो
फरधान/लखीमपुर। तापमान बढ़ने के साथ ही संक्रामक बीमारियों ने मासूमों को चपेट में लेना शुरू कर दिया है। फरधान क्षेत्र गनेशपुर गांव में तेज बुखार से एक बालक की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि उल्टी-दस्त और बुखार से जूझ रहे कई मासूमों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गनेशपुर गांव निवासी सलाउद्दीन के तीन वर्षीय पुत्र अरबाज को गुरुवार की सुबह तेज बुखार आया, पिता सलाउद्दीन ने पहले उसे गांव में एक निजी चिकित्सक को दिखाया, उसने बच्चे की गंभीर हालत को देखते हुए उसे लखीमपुर में दिखाने को कहा। जिसके बाद सलाउद्दीन ने उसे शहर के जच्चा-बच्चा नर्सिंग होम में भर्ती कराया, लेकिन उसकी हालत में सुधार नही हुआ। सलाउद्दीन ने बताया कि शुक्रवार की रात डॉक्टरों ने सीटी स्केन किया था, उसके थोड़ी ही देर बाद रात 11 बजे उसकी मौत हो गई। सलाउद्दीन ने बताया कि डॉक्टर ने बच्चे को दिमागी बुखार होने की बात बताई थी। इधर, उल्टी दस्त के कारण फत्तेपुर गांव के सुनील मिश्रा के पांच माह के पुत्र अर्पित, संकटा देवी के अमर का आठ माह का पुत्र उज्जवल और फरधान क्षेत्र के रतसिया गांव के आदित शुक्ला का पांच माह की पुत्री निष्ठा उल्टी-दस्त और बुखार से पीड़ित है। जिला अस्पताल में तीनों की हालत गंभीर बनी हुई है।
विज्ञापन

0000
बच्चे के गम में मां-बाप का बुरा हाल
बच्चा खोने से मां-बाप का रो-रो कर बुरा हाल है। सलाउद्दीन भूमिहीन है, उसका जॉब कार्ड भी नहीं बना है। बीपीएल कार्ड जरूरी है। अरबाज तीन पुत्रों मे सबसे छोटा और दोनों का चहेता था। उसके खोने का दर्द उनके चेहरों पर झलकता है।
0000
डायरिया के लक्षण और
बचाव के बारे में बताया
लखीमपुर खीरी। डायरिया प्रोग्राम के डिवीजनल कोआर्डिनेटर संजय सिंह ने जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केद्राें पर अपने ब्लाक कोआर्डिनेटराें के साथ डायारिया जागरूकता कार्यक्रम चलाया। इसमें उन्होंने आशा, एएनएम व वीएचएनडी के डायरिया के लक्षण कारण और उपचार बताया।
विज्ञापन

डायरिया प्रोग्राम के डिवीजनल कोआर्डिनेटर संजय सिंह ने बताया कि बच्चों में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण डायरिया है। आकड़ों के मुताबिक देश में हर साल तीन लाख बच्चे डायरिया से मर रहे है। डायरिया कार्यक्रम का उद्देश्य डायरिया से होने वाली मृत्यु में कमी लाना है। इसके बचाव में ओआरएस और जिंक की थेरेपी डायरिया में बहुत ही कारगर है। इस थेरेपी से बच्चे के उल्टी, दस्त ठीक हो जाते है। उन्होंने बताया कि ओआरएस घोल दस्त आने के 24 घंटे अंदर पिलाया जाता है। जिंक का घोल 14 दिनों का है। इसे 2 स 6 माह के बच्चों को जिंक की आधी गोली प्रतिदिन मां को अपने दूध में घोलकर देनी चाहिए। छह माह से ऊपर पूरी गोली देनी चाहिए। जिंक का पूरा कोर्स होने से अगले तीन माह तक बच्चे को डायरिया होने की संभावना नही रहती है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें