कुपोषण पीड़ित बच्चों को बचाने की कवायद, अति कुपोषित बच्चों के लिए बनेगा अलग से वार्ड
लखीमपुर खीरी। नए वर्ष पर जिले के लोगों को कुपोषण पुनर्वास केंद्र्र का तोहफा मिलेगा। जिले के अति कुपोषित बच्चों कोपोषण देने तथा उन्हें रोग मुक्त करने के उद्देश्य से जिला अस्पताल में पोषण पुनर्वास केंद्र बनेगा। यूनीसेफ के सहयोग से जिला अस्पताल में यह सेवा नए वर्ष में शुरू हो जाएगी। इस केंद्र के लिए सर्वे हो चुका है योजना को अमली जामा पहनाने के लिए तैयारियां लगभग अंतिम दौर में हैं।
बताते चलें कि केंद्र सरकार की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार देश में छह माह से पांच वर्ष तक के कुपोषित बच्चों की संख्या 42 प्रतिशत है। कुपोषित बच्चों में 5 प्रतिशत बच्चे अति कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। इन पांच प्रतिशत बच्चों के चेहरे पर सूजन होती है। बच्चे की उम्र और लंबाई के अनुपात में वजन कम होता है। उम्र के हिसाब से बच्चों की लंबाई भी प्रभावित होती है। इन बच्चों में धीरे-धीरे तमाम बीमारियां पनपने लगती हैं। अति कुपोषित बच्चों में कई की असमय मौत भी हो जाती है। यूनीसेफ और सरकार ने मिलकर अब अति कुपोषित बच्चों को पोषण देने तथा उन्हें बीमारियों से मुक्त करने का लक्ष्य बनाया है। योजना को अमली जामा पहनाने के लिए जिला अस्पताल में एक अलग वार्ड स्थापित किया जाएगा। जिला अस्पताल की ओपीडी के अलावा सीएचसी और पीएचसी में आने वाले हर बच्चे पर डॉक्टरों की नजर रहेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे बच्चों को चिह्नित करने की जिम्मेदारी आशा, आंगनबाड़ी और एएनएम को सौंपी जाएगी। यदि उन्हें इस तरह का कोई बच्चा मिलता है तो वे लोग जिला चिकित्सालय में इसकी रिपोर्ट करेगी। इस तरह के बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।
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इस तरह भर्ती होंगे अति कुपोषित बच्चे
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एनके शर्मा ने बताया कि आशा, एएनएम या अन्य किसी व्यक्ति को यदि कोई अति कु पोषित बच्चा मिलता है तो वे लोग इस तरह के बच्चों को जिला अस्पताल में लाएंगी यहां उन बच्चों का परीक्षण किया जाएगा। जांच के बाद जिन बच्चों का स्टैंडर्ड डेनिएशन कम होगा उन बच्चों को जिला अस्पताल में भर्ती किया जाएगा।
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बच्चों की नियमित होगी मॉनीटरिंग
यूनीसेफ की मंडलीय स्वास्थ्य एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ. संगीता करमाकर ने बताया कि जिला अस्पताल में भर्ती बच्चों की नियमित मॉनीटरिंग की जाएगी। इन बच्चों को दवाओं के अलावा दूध, पौष्टिक आहार तथा पोषण की खुराक व अन्य आवश्यक सामग्री जिला अस्पताल की तरफ से दी जाएगी। पूरी तरह से स्वस्थ हो जाने के बाद ही इन बच्चों की अस्पताल से छुट्टी की जाएगी।
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अंतिम दौर में हैं तैयारियां
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनके शर्मा ने बताया कि एक सप्ताह पूर्व यूनीसेफ की टीम ने जिला अस्पताल का सर्वे कर लिया है। तात्कालिक रूप से योजना जिला अस्पताल के चाइल्ड वार्ड से शुरू कर दी जाएगी। नए वार्ड के लिए भी जगह का चयन हो गया है। नया वार्ड बनने के बाद यह केंद्र उसमें चला जाएगा। अन्य सभी तैयारियां लगभग पूरी हो गई हैं।